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अब बच न पायेगा बलात्कारी, राष्ट्रपति ने लगायी सख्त कानून पर मुहर

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अगर सुबह सुबह आप अख़बार खोलें तो किसी न किसी पन्ने में आपको बलात्कार से जुडी खबर पढ़ने को मिल ही जाएगी. लेकिन रोज़ रोज़ अख़बारों में या टेलीविज़न न्यूज़ में बलात्कार से जुडी खबर आनी, यह अपने आप में एक भयावह स्थिति है. इस परेशानी से लड़ने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को मृत्युदंड तक की सजा देने संबंधी अध्यादेश को आज स्वीकृति प्रदान कि है.

केंद्रीय कैबिनेट ने रविवार को उस अध्यादेश को स्वीकृति दी जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार करने के दोषी ठहराये गये व्यक्ति के लिये मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने की अदालत को इजाजत दी गई है.

  1. गजट अधिसूचना में कहा गया है, ”संसद का सत्र अभी नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि जो परिस्थितियां हैं उनमें यह आवश्यक था कि वह तत्काल कदम उठाएं”.
  2. इसके अनुसार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संविधान के अनुच्छेद 123 के उपखंड (1) में दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए अध्यादेश को हरी झंडी दिखाई है.
  3. आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2018 के मुताबिक ऐसे मामलों से निपटने के लिये नयी त्वरित अदालतों का गठन किया जायेगा.
  4. सभी पुलिस थानों और अस्पतालों को बलात्कार के मामलों की जांच के लिए विशेष फॉरेंसिक किट उपलब्ध करायी जाएगी.

अधिकारीयों ने बताया कि इस अध्यादेश के मुताबिक यदि 12 से 16 से काम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार का मामला सामने आता है तो दिशियों को सख्त सज़ा दी जाएगी. वही 12 से कम उम्र की बच्ची के साथ यदि कोई मामला सामने आता है तो दोषी को सजा-ए-मौत दी जाएगी और 16 साल से कम के मामले में उर्म्र कैद की सा होगी.

अधिकारी ने बताया कि भारतीय दंड संहिता (IPC), साक्ष्य अधिनियम, आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) और यौन अपराधों से बाल सुरक्षा (POCSO) अधिनियम को अब संशोधित माना जायेगा. अध्यादेश में मामले की त्वरित जांच एवं सुनवाई की भी व्यवस्था है.

राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) के आँकड़े बताते हैं कि जहां 2015 में 34,651 मामले दर्ज किए गए थे वही 2016 में वो आँकड़े बढ़ कर 38,947 हो गए. एक साल में 12.4% की बढ़ोतरी हुई. इसका मतलब ये हैं कि भारत मे हर रोज़ 106 बलात्कार होते हैं. ये आँकड़े किसी भी देश के लिए शर्मनाक है.

यदि हम बात करें बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों की तो उसमें 82% की वृद्धि हुई है. अब बच्चों के साथ होने वाले बलात्कार के आँकड़े देखते हैं, 2015 में 10,854 मामले दर्ज किए गए थे जो कि 2016 में बढ़ कर 19,765 हो गए.

अध्यादेश के अहम प्रावधान

  • बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जायेगा.
  • मामलों में पीड़ितों का पक्ष रखने के लिए राज्यों में विशेष लोक अभियोजकों के नए पद सृजित होंगे
  • वैज्ञानिक जांच के लिए सभी पुलिस थानों और अस्पतालों में विशेष फॉरेंसिक किट मुहैया कराई जाएंगी
  • रेप की जांच को समर्पित पुलिस बल होगा, जो समय सीमा में जांच कर आरोप पत्र अदालत में पेश करेग
  • क्राइम रिकार्ड ब्यूरो यौन अपराधियों का डेटा तैयार करेगा, इसे राज्यों से साझा किया जाएगा
  • पीड़ितों की सहायता के लिए देश के सभी जिलों में एकल खिड़की बनाया जाएगा.

क्या है POCSO एक्ट ?

पोक्सो, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act – POCSO) का संक्षिप्त नाम है.पोक्सो एक्ट-2012 के अंतर्गत बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न और यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने पोक्सो एक्ट-2012 बनाया था.

पहली बार कानून में यौन उत्पीड़न के विभिन्न स्वरूपों को परिभाषित किया गया। बच्चों की कस्टडी के दौरान पुलिस व कर्मचारियों की ओर से किए गए उत्पीड़न के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए.

यह अधिनियम बच्‍चे को 18 वर्ष से कम आयु के व्‍यक्ति के रूप में परिभाषित करता है और बच्‍चे का शारीरिक, भावनात्‍मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करने के लिये हर चरण को ज्‍यादा महत्त्व देते हुए बच्‍चे के श्रेष्‍ठ हितों और कल्‍याण का सम्‍मान करता है। इस अधिनियम में लैंगिक भेदभाव (gender discrimination) नहीं है।

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