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इंजीनियरिंग कर नौकरी ढूंढ रही थीं, चुनाव जीता, बनीं सबसे कम उम्र की एमपी

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बीजेडी टिकट से लड़ा चुनाव की है इंजीनियरिंग से ग्रेजुएट खोज रही थीं नौकरी

मात्र 25 साल 11 माह की उम्र और इस बार बनीं लोकसभा एमपी, ये कहानी चंद्राणी मुर्मू की है. अब वे क्योंझर लोकसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं. लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला सांसदों को भेजने के साथ ही ओडिशा ने सबसे कम उम्र की महिला सांसद को भी लोकसभा में भेजा है। महिला एमपी चंद्राणी इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। वह बीजेडी टिकट पर क्योंझर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची हैं। ये सीट अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित है। इस जीत के साथ मर्मू लोकसभा में इतिहास रचने जा रही हैं, क्योंकि वे अब तक की सबसे कम उम्र की सांसद बनी हैं।

इस चुनाव में मुर्मू ने 67,822 मतों के अंतर से बीजेपी के दो बार से एमपी रहे अनंत नायक को हराया है। कुछ महीने पहले मुर्मू किसी अन्य लड़की की तरह भुवनेश्वर के एसओए विश्वविद्यालय से बी. टेक पूरा करने के बाद नौकरी तलाश रही थीं और इसके लिए वे नौकरी में भर्ती वाले एग्जाम की तैयारी कर रही थीं। चंद्राणी कहती हैं कि मैं खुद का इंजीनियरिंग कोर्स पूरा करने के बाद नौकरी खोज रही थी। मैंने सोचा भी नहीं था कि मैं राजनीति में आऊंगी और एमपी बनूंगी। मेरा नामांकन अचानक हुआ था।’

नाना हरिहर सोरेन एमपी थे

मुर्मू ने मौका देने के लिए क्योंझर के लोगों और बीजू जनता दल चीफ और सीएम नवीन पटनायक का शुक्रिया अदा किया। दरअसल, चंद्राणी मुर्मू के नाना हरिहर सोरेन 1980-1989 तक दो बार कांग्रेस से एमपी रह चुके हैं। वैसे मुर्मू का परिवार राजनीति में कभी नहीं रहा है। इस बार ओडिशा की कुल 21 संसदीय सीट में से सात महिला एमपी चुनी गई हैं। राज्य में ये संख्या कुल सांसदों का 33 प्रतिशत है। संसद में ओडिशा से 33 प्रतिशत महिला एमपी हिस्सा देने वाला यह पहला राज्य बना है।

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