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इरडा का प्रस्ताव – बीमा कंपनियां मानसिक और आनुवांशिक बीमारियों को भी कवर करें

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संस्था ने कहा : डॉक्टर ने डिप्रेशन की दवाएं लिखी हैं, तो इसे बीमा कवर से बाहर नहीं कर सकते
मेनोपॉज मामले और आयु संबंधी गड़बड़ियां भी स्वास्थ्य बीमा  पॉलिसी की परिधि में सम्मिलित हों

नई दिल्ली- बीमा नियामक संस्था ‘इरडा’ ने दिमागी दिक्कतों, मनोवैज्ञानिक गड़बड़ियों, अनुवांशिक बीमारियों और मस्तिष्क संबंधी विकारों को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के दायरे से बाहर न किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इरडा का मानना है कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी से जुड़ी कंपनियों को इस सन्दर्भ में समरूपता रखनी ही होगी। स्वास्थ्य बीमा कंपनियां और इससे जुड़े उत्पादों की बढ़ रही संख्या को ध्यान में रखकर ‘इरडा’ ने ये प्रस्ताव पेश किया है।

‘इरडा’ के अनुसार,  उत्तेजक या डिप्रेशन संबंधी वे  दवाएं जो डॉक्टरों ने लिखी हैं,  उन्हें भी बीमा कवर के दायरे में रखना आवश्यक है।

यहां तक कि यौवन या  मेनोपॉज संबंधी गड़बड़ियों, उम्र और अन्य व्यावहारिक विकारों को भी इससे बाहर रखना उचित नहीं है। ‘इरडा’ ने इस मामले में मसौदे के दिशा-निर्देशों पर संबंधी लोगों से 31 मई तक प्रतिक्रियाएं मांगी हैं।

‘इरडा’ की राय में प्रस्तावित दिशा-निर्देशों  का उद्देश्य स्वास्थ्य बीमा के सुरक्षा  दायरे से बाहर रखने को तर्कसंगत और समरूप बनाये रखना है। ‘इरडा’ ने इसके लिए कार्यकारी समूह बनाया था। समूह की जरुरी बातें समझने के बाद दिशा-निर्देश जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है।

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