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करारी हार के बाद कांग्रेस के सामने राज्यसभा का दूसरा संकट

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नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में करारी हार झेल रही कांग्रेस के सिर्फ 52 नये सांसद ही संसद पहुंच रहे हैं, साथ ही, इसे नेता-विपक्ष का भी दर्जा नहीं मिलने जा रहा है. अब भी राहुल गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अड़े हैं. यदि वे टस से मस नहीं होते हैं, तो पार्टी कमान कौन संभालेगा, ये सबसे बड़ा सवाल है. इस बीच, एमपी और कर्नाटक की राज्य सरकारों पर भी संकट मंडरा रहा है.

कर्नाटक कांग्रेस नेता केएन रजन्ना कह रहे हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ लेते ही राज्य में कांग्रेस
सरकार गिर जाएगी. उधर, एमपी में कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहीं बीएसपी विधायक ने आरोप लगाया है कि उन्हें बीजेपी 50 करोड़ रुपये के ऑफर दे रही है. अभी पार्टी इन झंझटों से जूझ रही है कि उसके सामने हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड असेंबली के चुनाव भी हैं.

खैर, जो भी कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा, उनके सामने इन राज्यों में पस्त पड़े कांग्रेस कार्यकर्ताओं में दोबारा जान फूंकने की बड़ी चुनौती होगी. इसके अलावा, कांग्रेस के सामने एक और बड़ा संकट ये भी है कि अगले साल तक बीजेपी राज्यसभा में भी बहुमत में होगी. इसके बाद बीजेपी को अपना एजेंडा लागू करने से रोकना अब आसान भी नहीं होगा. फिलहाल केंद्र में नये आये एनडीए के पास राज्यसभा में 102 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी संप्रग के पास सिर्फ 66 और दोनों गठबंधनों से बाहर की पार्टियों के पास 66 सदस्य हैं. अगले साल नवंबर तक एनडीए खेमे में लगभग 18 सीटें और जुड़ जाएंगी. इस तरह एनडीए को कुछ नामित, निर्दलीय और असंबद्ध सदस्यों का समर्थन जरूर मिलने वाला है. उधर, राज्यसभा की आधी संख्या 123 बैठती है और इस सदन के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभाओं के सदस्य करते हैं.

  • सीटें यानी गणित की बाजीगरी

अगले साल नवंबर में यूपी की खाली होने जा रही राज्यसभा की 10 में से ज्यादातर सीटें बीजेपी ही जीतेगी. इनमें से नौ विपक्षी दलों के पास हैं. इनमें से छह एसपी के पास, जबकि दो बीएसपी और एक कांग्रेस के पास है. यूपी विधानसभा में बीजेपी के 309 विधायक हैं. एसपी के 48, बीएसपी के 19 और कांग्रेस के सात विधायक हैं. अगले साल तक बीजेपी को असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में सीटें मिलेंगी. राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में बीजेपी अपनी सीटें गंवाएगी भी, जबकि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभाओं के चुनावी नतीजों का भी एनडीए की कुल सीट संख्या पर असर होने जा रहा है. असम की दो सीटों के चुनाव का ऐलान हो चुका है, जबकि असम की तीन और सीटें अगले साल तक खाली हो जाएंगी. बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों के पास राज्य विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत है. ऊपरी सदन यानी विधान परिषद् की लगभग एक-तिहाई सीटें इसी साल जून और अगले साल नवंबर में खाली होने जा रही हैं. असम की दो सीटें अगले महीने खाली होने जा रही हैं. साथ ही, तमिलनाडु में इस साल जुलाई तक छह सीटें खाली हो जाएंगी. इसके बाद अगले साल अप्रैल महीने में 55 सीटें खाली होंगी और पांच जून, एक जुलाई और 11 नवंबर में कुछ और सीटें खाली होंगी.

  • मनमोहन सिंह का कार्यकाल जून में खत्म

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह इस समय असम से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन उनका कार्यकाल जून में खत्म होने जा रहा है. डॉ. मनमोहन सिंह जैसे आर्थिक नीति पर विशेषज्ञ कांग्रेसी नेता का राज्यसभा में न होना
कांग्रेस के लिए बड़े झटके से कम नहीं है. असम विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की इस समय जो संख्या है, उसे देखते हुए डॉ. मनमोहन सिंह की सीट नहीं बच सकती है. 7 जून को राज्यसभा के चुनाव होने हैँ. इसके अलावा, असम से एक और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एस कुजूर का भी कार्यकाल 14 जून को पूरा हो रहा है. इनकी सीट भी बीजेपी के खाते में जाने को बेताब है.

  • क्या जेडीएस कांग्रेस की मदद करेगी

22 राज्यों में अगले साल 72 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने की स्थिति में कांग्रेस के पास एक मौका होगा कि वह डॉ. मनमोहन सिंह को राज्यसभा भेज पाये, लेकिन इसके लिए उसे कम से कम जेडीएस की मदद जरूर चाहिए, लेकिन इसमें भी पेच है, उसे कांग्रेस या जेडीएस में से एक को मनमोहन सिंह या एचडी देवगौड़ा में से चुनना ही होगा. लेकिन इस बार बने सियासी ग्राफ को देखते हुए ये सब इतना आसान है नहीं.

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