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Medha Milk

गर्भाशय में कैंसर से लाखों महिलाएं की होती मौतें

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50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में सबसे अधिक जोखिम
समय रहते जांच से बच जाती है जान

गर्भाशय यानी यूट्रस में कैंसर होना ऐसी बीमारी है जो महिलाओं को किसी भी आयु में होने की आशंका बनी रहती है. 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को इसके जोखिम सबसे अधिक होते हैं। महिलाओं का लापरवाही भरा स्वभाव के कारण उनमें इस तरह के कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। गर्भाशय कैंसर के लक्षणों पर महिलाएं अक्सर लापरवाही बरतती हैं, जिसके कारण यह बीमारी गंभीर शक्ल ले लेती है। वहीं, ज्यादातर महिलाएं इस बीमारी की सही समझ न होने के चलते इसकी चपेट में आ जाती हैं। ऐसे में, आज आपको गर्भाशय सम्बन्धी कैंसर की बीमारी के कुछ कारण और लक्षण बता रहे हैं। इसे पहचान कर आप इसके खतरे को समय रहते घटा सकती हैं। तो चलिए, जानते हैं- इस बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय।

समय पर जांच से काफी कामयाबी

इस तरह के कैंसर की जांच में तब काफी कामयाबी मिलती है, जब समय पर जांच हो जाये। शरीर विज्ञानियों का कहना है कि मूत्र जांच के माध्यम से भी इस तरह के कैंसर का जानकारी मिल जाती है। ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अनुसन्धानकर्ताओं का कहना है कि सही समय पर जांच हो जाने पर महिलाएं इसके जोखिम से स्वयं को बचा सकती है। यहां तक कि कई विकासशील देशों में गर्भाशय के कैंसर होने की आशंका 15 गुना तक अधिक पायी गयी है, किन्तु उन देशों में इसकी आम प्रचलन में प्रयोग होने वाले स्मियर जांच की सुविधा न होने की वजह से यह बीमारी होती, बढ़ती और खतरनाक शक्ल लेती जा रही है। अगर इन देशों में मूत्र- जांच की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो कई औरतों की असमय होने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है। इस जोखिमभरी बीमारी से विश्वभर में हर वर्ष लाखों जिंदगी का अंत रुक सकता है अर्थात गर्भाशय के कैंसर का समय पर पता न चल पाना ज्यादा जोखिमभरा है।

गर्भाशय में कहां होती है ये बीमारी

दरअसल, गर्भाशय की भीतरी परत को ‘एंडोमेट्रियम’ कहते हैं। जब इसी की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लग जाती हैं, तो वे ‘एंडोमेट्रियल कैंसर’ की वजह बनती हैं। इस कैंसर को गर्भाशय का कैंसर या बच्चेदानी में पैदा हुआ कैंसर भी कहते हैं।

गर्भाशय कैंसर 28 से 36 वर्ष की आयु वाली महिलाओं में सबसे अधिक होता पाया गया है। इसकी जांच होने पर इसके कैंसर-पूर्व स्टेज का पता चलता है। इसका अर्थ है कि यह कैंसर होने के 6-10 साल पहले ही जांच में इसका पता किया जा सकता है। इसलिए बेहतर जांच सुविधा होना अधिक आवश्यक है क्योकि ऐसा होने पर अधिक महिलाओं का जीवन सुरक्षित कर उन्हें बचाया भी जा सकती है। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि 70 में से एक महिला गर्भाशय के कैंसर से पीड़ित है। इसकी मुख्य वजह है, सही समय पर इस बीमारी का पता न लग पाना।

गर्भाशय की भीतरी परत ‘एंडोमेट्रियम’ कहलाती है। जब एंडोमेट्रियम की कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं, तो यही एंडोमेट्रियल कैंसर का कारण भी बनती हैं। एंडोमेट्रियल एक कैंसर खतरनाक का नाम है, क्योंकि इसकी वजह से महिलाओं में मां बनने की ताकत चली जाती है। इसके अतिरिक्त संभव है कि ये कई दूसरी परेशानियों का भी कारण बन जाएं। एंडोमेट्रियल कैंसर को आम प्रचलन में गर्भाशय या बच्चेदानी का कैंसर कहते है।

अगर ये है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

एंडोमेट्रियल कैंसर होने पर कई लक्षण आमतौर पर दिखते है। यदि ये लक्षण जल्दी-जल्दी दिख रहे हैं, तो देरी मत कीजिये और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

असामान्य पीरियड होना

अगर किसी महिला को पीरियड्स के अलावा भी एकाएक खून आने लगता है या खून के साथ योनि से किसी अन्य तरह का लिक्विड निकल रहा हो, तो यह ‘एंडोमेट्रियल कैंसर’ का लक्षण भी हो सकता है। ऐसा होने पर आप तुरंत जांच करवाएं। इसके अतिरिक्त, पीरियड का चक्र निरंतर बदल रहा हो या मेनोपॉज के बाद भी खून आ रहा हो, तो भी यह शुरू के एंडोमेट्रियल कैंसर के लक्षण हैं। इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत महिला डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।

पेड़ू में दर्द

अनेक महिलाओं को गर्भाशय के कैंसर होने की स्थिति में अनियमित ब्लीडिंग और डिस्चार्ज के साथ पेल्विक या पेड़ू (जननांग के ऊपरी हिस्से) में दर्द हो सकता है। अगर कैंसर की वजह से गर्भाशय बढ़ जाता है तो संभव है कि इस जगह ऐंठन और दर्द होता हो। अगर ब्लीडिंग के साथ इस
तरह का दर्द हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।

एकाएक वजन घटना

शरीर के भारीपन में कमी आना कई वजहों से संभव है, लेकिन अगर उपर्युक्त बताये गये लक्षणों के अलावा एकाएक वजन घटने की समस्या दिख रही है, तो इसकी कतई अनदेखा ठीक नहीं है, क्योंकि ये एंडोमेट्रियल कैंसर के आगमन की सूचना भी हो सकता है। इसके कारण महिलाओं में मेनोपॉज की अवधि बढ़ जाती है इसलिए अब जांच तुरंत जरूरी है।

बार-बार पेशाब होने की शिकायत

एंडोमेट्रियल कैंसर आपकी पेशाब आने की आदतें ही बदल देता है। यह आपके गर्भाशय से जुड़ी दिक्कतों की सूचना देता है। एंडोमेट्रियल कैंसर होने पर रह-रहकर पेशाब आना, पेशाब करने में दिक्कतें होने और पेशाब करते समय दर्द होना भी इस कैंसर के संकेत हैं।

भारतवर्ष में गर्भाशय यानी बच्चेदानी के मुख से जुड़े कैंसर से होने वाली मृत्यु की दरें बाकी देशों की तुलना में ज्यादा हैं। कुछ समय पहले तरह के कैंसर के नये मरीज 96,322 थे, जिनमें से करीब 60,078 महिलाओ की इसी बीमारी के चलते मौतें हो हुई हैं।

शहरों की तुलना में गांव में ज्यादा रोगी

बचाव के उपाय

  • तंबाकू से परहेज
  • अल्कोहल न पीयें
  • महिलाओं में नियमित रूप से पेप स्मियर जांच जरूरी
  • कम खाएं मांस
  • स्वस्थ आहार लें
  • वायरस और बैक्टीरिया से करें बचें
  • रखें वजन पर कंट्रोल
  • करें नियमित व्यायाम
  • फलों और सब्जियों का अधिक सेवन
  • असामान्य रक्तस्राव का तुरंत उपचार जरूरी

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