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गिरिडीह में तीन नवजातों की मौत,परिजनों ने की हॉस्पिटल में तोड़फोड़

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गिरिडीह: सदर अस्पताल की अनुषंगी इकाई मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र में मंगलवार की सुबह तीन नवजात की जान चली गई. तीनों नवजातों की मौत चिकित्सीय लापरवाही से हुई. गुस्साए लोगों ने सुबह करीब 8 बजे अस्पताल में जमकर हंगामा बरपाया.

इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉ. गोविंद प्रसाद के साथ धक्कामुक्की और नर्सों के साथ मारपीट भी हुई. सूचना मिलने के बाद पचंब थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हंगामा करने वाले लोग वहां से जा चुके थे. हंगामे केी वजह से ड्यूटी कर रहीं सारी नर्स वहां से सदर अस्पताल चली गईं.

चैताडीह अस्पताल में फिलहाल काम रुका हुआ है. हॉस्पिटल का काम रुक जाने से मरीज और इलाज कराने वाले आमजन परेशान हैं. हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने एलान किया है कि जब तक चैताडीह में पुलिस सुरक्षा नहीं देगी तब तक वे वहां ड्यूटी नहीं कर सकेंगे.

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कैलीबाद निवासी राधा देवी पति सुधीर ठाकुर, नगर थाना क्षेत्र के वाभनटोली निवासी नेहा देवी पति शशि राम व गांडेय थाना क्षेत्र के मंडरो की नीलम कुमारी पति उमेश कुमार के नवजात की जान गई हुई है. तीनों महिलाओं को दो दिन पहले ही मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र में सामान्य प्रसव हुआ था. तबीयत बिगड़ने के बाद तीनों नवजात को एसएनसीयू में बीती रात एडमिट कराया गया था.

परिजनों ने आरोप लगाया है कि वहां ड्यूटी पर तैनात डॉ. गोविंद प्रसाद ने तीनों को एक इंजेक्शन दिया था, इसके बाद तीनों बच्चों ने एक-एक कर दम तोड़ दिया. वहीँ डॉ. गोविंद प्रसाद का कहना है कि नवजातों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्होंने रात को ही तीनों को पीएमसीएच धनबाद रेफर कर दिया था.

नीलम कुमारी के बच्चे को उसके परिजन रात को ही ले गए थे, जबकि दोनों बच्चों को उसके परिजन बाहर नहीं ले गए. सुबह में करीब सौ से भी ज्यादा बाहर के लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ व मारपीट की. इधर, मातृत्व व शिशु कल्याण केंद्र की नर्सें तनूजा कुमारी, शुभ्रा राय, कविता कुमारी, हमीदा खातून और मीना देवी का कहना है की चैताडीह में बिना सुरक्षा के काम करना मुमकिन नहीं है. उनकी जान को खतरा हो सकता है.

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