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जेपी इन्फ्राटेक के कर्जदाताओं की वोटिंग प्रक्रिया अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द की

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एनबीसीसी की बोली पर गुरुवार को वोटिंग शुरू हुई, रविवार को खत्म होनी थी
आईडीबीआई बैंक ने एनबीसीसी के प्रस्ताव को सशर्त बताकर आपत्ति जताई
ट्रिब्यूनल ने कहा- 31 मई से नए सिरे से वोटिंग हो, फिर से बातचीत की इजाजत दी

नई दिल्ली। भारत के कंपनियों के विवादों को निपटने वाली संस्था नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल-एनसीएलएटी ने जेपी इन्फ्राटेक के अधिग्रहण के लिए कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स यानी सीओसी की मतदान-प्रक्रिया शुक्रवार को रद्द कर दिया। ट्रिब्यूनल ने 31 मई से नये सिरे से मतदान कराने को कहा है।

बृहस्पतिवार को एनबीसीसी की बोली पर सीओसी ने मतदान आरम्भ किया था। रविवार को ये प्रक्रिया पूरी होनी थी और सोमवार को नतीजे घोषित होने थे। आईडीबीआई बैंक ने एनबीसीसी की बोली पर कुछ आपत्तियां उठाई थीं। उधर बैंक का साफ तर्क है कि एनबीसीसी ने शर्त के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

हालांकि एनसीएलएटी ने सीओसी को एनबीसीसी के प्रस्ताव पर दोबारा मोल-भाव की अनुमति भी दी है। न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ का कहना है कि योजना कानून के अनुसार होने पर सीओसी उसे हरी झंडी दे सकती है, किंतु रद्द करने के लिए एनसीएलएटी की मंजूरी जरूरी होगी। एनसीएलएटी ने जेपी के परियोजना में फंसे 5,000 घर खरीदारों के 9 संगठनों को हस्तक्षेप का आवेदन पत्र दाखिल करने की अनुमति भी दे रखी है।

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