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झारखंड के खूंटी में अर्जुन मुंडा और कालीचरण मुंडा के बाद जनता की पसंद NOTA

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खूंटी: ज्यादातर जगहों पर एकतरफा मुक़ाबला देखने बाद झांखण्ड के खूंटी में एक मुक़ाबला टक्कर वाला रहा. बहरहाल इस मुक़ाबले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को सफलता हासिल हुई. उनके और कांग्रेस के कालीचरण मुंडा के बिच हार-जीत का अंतर बहुत कम रहा. इस सीट की सबसे खास बात यह रही कि दो प्रत्याशियों के अलावा सभी प्रत्याशी NOTA (None of the Above) से हार गये.

NOTA से हार गए से मेरा मतलब है की इस दौड़ में पहले स्थान रहे पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के कालीचरण मुंडा और तीसरे नंबर रहा नोटा. मतलब इन दो नेताओं के नाम का बटन दबाने के बाद जनता ने ज्यादा NOTA का बटन दबाया. ऐसा ही कुछ हाल सिंहभूम सीट पर भी रहा. यहां गीता कोड़ा और लक्ष्मण गिलुवा के अलावा कोई भी प्रत्याशी नोटा से ज्यादा वोट नहीं ला पाया.

खूंटी में कुल मिलाकर 11 प्रत्याशी थे. इसमें कांग्रेस और भाजपा के अलावा BSP, JKP, SBP, BMSM, AHNP, RTSGP एवं तीन निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे. कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवार के बाद जनता को NOTA का बटन दबाना योग्य लगा.

खूंटी के ढाई फीसदी से अधिक मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. कालीचरण और अर्जुन मुंडा के अलावा किसी भी प्रत्याशी को इससे ज्यादा वोट नहीं मिले. निर्दलीय प्रत्याशी मीनाक्षी मुंडा को 10,619 वोट मिले, लेकिन वह नोटा से बहुत पीछे रह गयीं. खूंटी में 20 हजार से ज्यादा लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया. यहां BSP प्रत्याशी इंदुमती मुंडू को 7,329 मत मिले, जबकि JKP के अजय टोपनो को 8,417 वोट मिले.

SBP प्रत्याशी अबिनाशी मुंडू को 2,290 मत मिले, जबकि BMSN के नील जस्टिन बेक को 1,788 और AHNP के उम्मीदवार मुन्ना बड़ाईक को 1,799 वोट पड़े. RTSGP के सिबिल कंडुलना को 3,813, निर्दलीय मैदान में खड़े हुए नियारन हेरेंज को 4,425 और निर्दलीय सुखराम हेरेंज को 5,047 लोगों ने वोट किया.

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