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झारखंड में युवा RJD अध्यक्ष से प्रदेश RJD अध्यक्ष बनें, अभय कुमार सिंह

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RJD के शीर्ष नेतृत्व ने अभय कुमार सिंह को प्रदेश RJD अध्यक्ष की कमान सौंप दी है. अभय सिंह को इससे पहले युवा RJD अध्यक्ष की जवाबदेही सौंपी गई थी. अभय कुमार सिंह को ढाई महीनें में तीसरा RJD प्रदेश अध्यक्ष चुना गया हैं. क्यूँकि इससे ढाई महीनें पहले लोकसभा चुनाव के दौरान अन्नपूर्णा देवी BJP में शामिल हुई थी. जिसके बाद BJP के वरिष्ठ नेता गौतम सागर राणा को RJD प्रदेश अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन गौतम सागर राणा को ढाई महीनें में ही पद से हटना पड़ा.

अभय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष से पूर्व जब युवा RJD अध्यक्ष की जवाबदेही दी गई थी. उस समय अभय कुमार सिंह को विरोधी पार्टी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया. उनका निष्कासन RJD की अनुशासन समिति के स्तर से हुआ था और वहीं दूसरी तरफ RJD के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश RJD अध्यक्ष घोषित कर दिया.

लगभग डेढ़-दो महीने से RJD दो हिस्सों में नजर आ रही थी. जिसका कारण प्रदेश RJD और युवा RJD के बीच एक – दूसरे पर लगाए जा रहे आरोप थे
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प्रदेश RJD के एक ग्रुप ने युवा RJD अध्यक्ष अभय सिंह के निर्देश पर, पूर्व अध्यक्ष गौतम सागर राणा का पोस्टर फाड़ डालने का आरोप लगाया था.

वहीं दूसरी तरफ युवा RJD ने प्रदेश RJD अध्यक्ष पर गुटबाजी और संगठन को कमजोर करने का आरोप लगाया था.

दोनों का शिकायती पत्र RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पास पहुंचा. जिसके बाद सोमवार को नाटकीय ढंग से गौतम सागर राणा को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया.

RJD अध्यक्ष अभय सिंह इससे पहले विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं. अभय सिंह ने 3 बार विधानसभा चुनाव लड़े हैं. हालाँकि इन तीनों ही चुनावों में उन्हें सफलता प्राप्त नहीं हुई. इसके अलावा अभय सिंह बिहार में रांची क्षेत्र के विकास प्राधिकार के अध्यक्ष भी रहे चुकें हैं. 1996 से 2006 तक अभय कुमार सिंह रांची के जिलाध्यक्ष भी थे. 2012 में अभय सिंह को पार्टी का युवा अध्यक्ष चुना गया था.

पूर्व RJD प्रदेश अध्यक्ष गौतम राणा सिंह ने कहा कि 13 जून को वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ वर्तमान में मौजूद परिस्थितियों के बारे में बात करेंगे. अभय सिंह को RJD प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के विरोध में पूर्व प्रवक्ता मनोज कुमार, पूर्व महासचिव आबिद अली, मनोज पांडेय, कैलाश यादव आदि ने इसे एक खतरनाक निर्णय बताया है.

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