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फरवरी से नहीं मिल रहा मानदेय,फिर आवाज़ बुलंद करने की तैयारी में हैं झारखण्ड के पारा शिक्षक.

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रांची: स्थायी करने और मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर झारखण्ड के पारा शिक्षकों का गुस्सा फिर उबाल पर है. झारखण्ड के 67 हजार पारा शिक्षकों को फरवरी से मानदेय नहीं दिया गया है. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण उनकी होली बेरंग रही और अब सरकार रमजान की मिठास को कड़वा करने में लगी है.

मोर्चा के सदस्य संजय कुमार दुबे ने कहा है कि इस मसले पर मोर्चा के शिष्टमंडल ने 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं उन्हें बताई थी लेकिन इसके बावजूद मानदेय की उम्मीद लगाए बैठे है. मोर्चा ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और परियोजना निदेशक से राज्य के हजारों शिक्षकों की परेशानियों को सामने रखकर सकारात्मक पहल करने की गुहार लगायी है.

मोर्चा ने कहा है कि मानदेय नहीं मिलने से सैकड़ों पारा शिक्षकों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है जिसका असर घर और बहार दोनों के कामों पर पड़ रहा है.

आपको बता दें की पारा शिक्षकों के स्थायीकरण के लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक फरवरी महीने में शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव की अध्यक्षता में हुई थी. इस दौरान एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के साथ हुए समझौते को लेकर अब तक की गयी कार्रवाई की समीक्षा की गयी.

बैठक में निर्णय लिया गया था कि पारा शिक्षकों के स्थायीकरण के लिए नियमावली बनाने के लिए असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश एवं गुजरात में पारा शिक्षकों के लिए बनायी गयी नियमावली का अध्ययन किया जायेगा. राज्य परियोजना निदेशक को यह जिम्मेदारी दी गयी थी कि वह इन राज्यों में लागू नियमावली को डाउनलोड कर जल्द से जल्द कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करें.

इन राज्यों में लागू नियमावली के अध्ययन कर झारखंड में नई नियमावली बनायी जायेगी. परियोजना की ओर से पारा शिक्षकों के साथ हुए समझौता को लागू करने के लिए की गयी कार्रवाई के बारे में बताया गया था.

इतने सरे नियम और पर्किर्याओं के बाद भी पारा शिक्षकों को फिलहाल कोई रहत मिलती नज़र नहीं आ रही है. फिर से एक बार अपनी आवाज़ को बुलंद करने की तैयारी में लगे हैं झारखण्ड के पारा शिक्षक.

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