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बिग डिजिटल कंपनियां चुकाएंगी टैक्स, G-20 देशों की बन रही नीति

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G-20 देश इंटरनेट सेवा क्षेत्र में सेवा देने वाली वर्ल्ड की बड़ी डिजिटल कंपनियों के लिए नई कर नीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें किसी कंपनी पर टैक्स लगाने के अधिकार संबंधित देश को दिये जायेंगे, जहां वे TRADE कर रही हैं। अगले माह होने जा रही जी-20 देशों के चोटी के नेताओं के सम्मेलन में इस पर अंतिम बात बन सकती है।

जापान के बड़े बिजनेस पेपर ने जारी अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि जापान के शहर फुकुओका में जून में हो रहे सम्मेलन में इस अहम नीति पर G-20 GROUP के सभी सदस्य देशों के वित्त मंत्री-फाइनेंस मिनिस्टर साइन करेंगे। सबकी सहमति के बाद अंतिम एग्रीमेंट 2020 तक हो जाएगा।

यूं तो अभी इस पर फैसला नहीं हो पाया है कि ये नीति कैसे काम करेगी। कयास लग रहे हैं कि नई पॉलिसी के तहत कंपनियों को TAX के रूप में अपने राजस्व (Revenue) का हिस्सा उस देश को देना होगा, जहां उसके अपने उपभोक्ता ज्यादा हैं। यूं तो टैक्स किस तरह इकट्ठा होगा और इसमें बंटवारे का तरीका क्या होगा, इस पर आर्थिक एवं विकास संगठन-economic and development organisation ही अंतिम फैसला लेगी।

भारत को बड़ा प्रॉफिट

नई कर नीति-tax policy के कारण भारत जैसे देश बड़े फायदे में रह सकते हैं। नई नीति में ऐसा जोर होगा कि दुनिया की कोई बड़ी कंपनी अपने टैक्स की गणना और पेमेंट उस देश के दर को देखते हुए नहीं करेगी, जहां उसका मुख्यालय-HQ है। अब कंपनियों को टैक्स का भुगतान-paymet of tax जिन देशों में कारोबार trade हो रहा हो, उनके हिसाब से चुकाना होगा। यानी उसकी गणना उस देश की कंपनी के उपभोक्ताओं की संख्या से होगी। इस तरह भारत को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कई अरब रुपये के टैक्स मिलने का मौका मिल सकता है।

किन पर कसेगा शिकंजा

नई नीति का सबसे अधिक असर एपल, गूगल अमेजन और फेसबुक जैसी कंपनियों पर होने जा रहा है। इसके अतिरिक्त नेटफ्लिक्स, स्नैप, माइक्रोसॉफ्ट, फ्लिपकार्ट, अलीबाबा, टेनसेंट, बुकिंग, ई-बे, उबर, ट्विटर और ट्रिपएडवाइजर जैसी दो दर्जन से अधिक बहुराष्ट्रीय इंटरनेट कंपनियां नये कानून के भीतर आएंगी।

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