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बिहार में 57 बच्चों की मौत, खून में अचानक शुगर की कमी को बताई जा रही वजह

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बिहार इस वक़्त चमकी बुखार के भयावह दौर से गुज़र रहा है. बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) और जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) जिसे बिहार में चमकी बुखार के नाम से जाना जाता है. इस बीमारी के वजह से अब कुल 57 बच्चों की मौत हो चुकी है.

हालाँकि डॉक्टर और सरकारी अधिकारी बच्चों की मौत की वजह सीधे तौर पर इंसेफेलाइटिस कहने से बच रहे हैं. बच्चों के मौत की वजह पहले हाइपोग्लाइसीमिया मतलब कि ब्लड में अचानक शुगर की कमी या सोडियम की कमी बताई गई.

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ शैलेश सिंह ने बताया कि बीमार बच्चों में लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) या सोडियम और पोटेशियम की कमी देखी जा रही है.

तेज गर्मी, उमस, भूखे रहना और कुपोषण बच्चों के बीमार पड़ने की वजह बताई जा रही है.

जब ब्लड शुगर 70 मिलीग्राम प्रति डेसिलीटर पर हो, तो हाइपोग्लाइसीमिया के तुरंत इलाज की जरूरत होती है. इसके लिए हाई-शुगर फूड या ड्रिंक या फिर दवाइयों की जरूरत होती है.

मुज़फ़्फ़रपुर व आस-पास के इलाक़े में जहां लीची के बाग़ हैं, वहां 1995 से ही ऐसी दुर्घटनाएं होती रही हैं. साल 2014 में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स के Misery of Mystery of Muzaffarpur लेख में बताया गया कि कुछ एक्सपर्ट्स ने लीची और मुजफ्फरपुर में अप्रैल-जुलाई में सामने आने वाले दिमागी बुखार के बीच संबंध होने की हाइपोथीसिस दी थी.

लीची में कुछ ख़ास रसायन होने के बाबत द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में एक विशिष्ट शोध छपा था. इस फल में हायपोग्लायसिन ए एवं मेथिलीन सायक्लोप्रोपाइल ग्लायसीन होते हैं, जो कुपोषित बच्चों के ख़ून में शर्करा का स्तर बहुत घटा सकते हैं.

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