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रमजान : लाखों रोजेदारों ने एक साथ अदा की अलविदा की नमाज़

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नयी दिल्ली। आज रमजान के आखिरी जुमे की नमाज के मौके पर देशभर के करोड़ों मुसलमान भाइयों ने मस्जिदों में पहुंच कर अलविदा की नमाज में हिस्सा लिया. इस मौके पर दिल्ली के ऐतिहासिक जामा मस्जिद में एक लाख से ज्यादा मुसलमानों ने मिलकर बढ़-चढ़कर नमाज में शिरकत की, इस ख़ास मौके पर भीषण गर्मी की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में बूढ़े, महिलाएं, नौजवान और बच्चे भी अलविदा की नमाज अदा करने पहुंचे. सभी राज्यों-कश्मीर, यूपी, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों और यूनियन टेरिटरी से करोड़ों लोगों के मस्जिदों में पहुंचकर नमाज अता करने की ख़बरें मिल रही हैं.

रमजान का अंतिम जुमा होने के कारण सभी जगहों की मस्जिदों में सुचारु रूप से अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के लिए पहले से व्यापक तैयारी की गयी थी.

रमजान के पाक माह के अंतिम जुमे पर हजारों रोजेदारों ने अलविदा की नमाज अदा की। शिया, बरेलवी और देवबंद मसलक से जुड़े मुसलमानों ने अलविदा की नमाज अपनी अपनी मसजिदों पर अदा की गई। नमाज अदा करने बरेली और आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों नमाजी आए। मुल्क में अमन चैन कायम रहे इसके लिए मस्जिदों से दुआ की गई।

बरेलवी सुन्नी जामा मस्जिद में मुफ्ती खुर्शीद आलम ने नमाज अदा कराई और मुस्लिम समाज को नमाज में रमजान से सबंधित बारीकियां बताई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामात रहे।

रमजान से मुताल्लिक उलेमा ने रोशनी डाली गई। उन्होंने कहा कि रमजान में रोजा न रखना बहुत बड़ा गुनाह है। रोजे की अहमियत इसलिए और अधिक है कि इसमें गरीब अमीर एक समान बराबर है और सबके लिए एक ही रास्ता बताया गया है। अमीर मुस्लिम रोजा रखकर भूख की सिद्दत को जान सकें और किसी गरीब की अहमियत को पहचान सकें।

रोजेदारों के लिए ईद खुदा का तोहफा

मस्जिदों के इमामों ने कहा कि ये जुमा अलविदा इसलिए कहा जाता है कि ये रमजान का आखिरी जुमा होता है। रमजान का महीना जुमे के बाद पूरा होता है। उसकेे बाद ‘ईद’ मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि अल्लाह ताला ने रमजान के इनाम के बदले में ये तोहफा बक्शा है, जिसमें घर में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर किसी के शरीर पर नया लिबास रहता है। ईद की अहमियत रोजदार के लिए है। रोजेदार गर्मी के माह में भूखे-प्यासे रहकर गर्मी में रोजे रखते हैं, उसके बाद ईद का चांद देखकर ईद मनाते हैं। इमामों के मुल्क में सभी के बीच प्यार-मोहब्बत फैलाने के पैगाम भी दिये.

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