Ultimate magazine theme for WordPress.
Medha Milk

रेप पीड़िता को रिम्स ने किया स्वस्थ होने से पहले डिस्चार्ज. झारखण्ड हाईकोर्ट ने लगाई फटकार.

0

रांची: गैंगरेप पीड़िता को पूरी तरह ठीक होने से पहले डिस्चार्ज करने पर झारखंड हाईकोर्ट ने शनिवार को सरकार और रिम्स प्रशासन को फटकार लगाई.

झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार और रिम्स को पीड़ित महिला के उचित इलाज की व्यवस्था करने और महिला को पूरी तरह ठीक होने के पहले घर भेजे जाने पर जांच का आदेश दिया है। अदालत ने 10 जून तक इस  मामले से जुडी रिपोर्टको पेश करने के लिए कहा है.

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने यह निर्देश दिया और साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा कि रिम्स में कुछ भी व्यवस्थित नहीं है. डॉक्टर सिर्फ दो घंटे ड्यूटी कर रहे हैं. ज्यादातर डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं.

यह अस्पताल कभी राज्य का गौरव हुआ करता था. लेकिन हॉस्पिटल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। रिम्स की स्थिति के वजह से रांची में कई प्राइवेट हॉस्पिटल खुलते जा रहे हैं. आखिर कब तक ऐसे हालात बने रहेंगे. कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट प्रैक्टिस करनेवाले रिम्स के डॉक्टरों पर निदेशक एक्शन लें.

अदालत की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव, रिम्स निदेशक और पीड़िता का इलाज करने वाले डॉक्टर को दोपहर 12.15 बजे हाजिर होने का आदेश दिया. रिम्स की ओर से बताया गया कि महिला का इलाज किया जा रहा है. सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया कि पीड़िता का पूरा इलाज किया जाएगा.

पीड़िता के पति ने झालसा को एक पत्र लिखा. इसमें कहा गया है कि वो गुजरात में काम करते हैं. उनकी पत्नी गांव में ही रहती है. जनवरी महीने में साप्ताहिक बाजार से सब्जी बेच कर घर वापस लौटते वक़्त रास्ते में महिला का सामूहिक बलात्कार किया गया . इसके बाद महिला को इलाज के लिए लातेहार के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ दिन बाद डॉक्टरों ने उसे रिम्स रेफर कर दिया. 27 मार्च तक पीड़ित महिला का इलाज रिम्स में चला. डिस्चार्ज स्लिप में पीड़िता को पूरी तरह स्वस्थ नहीं बताया गया था लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने महिला को डिस्चार्ज कर दिया. लातेहार पहुंचने के बाद महिला की तबियत फिर से खराब हो गई. महिला को दोबारा रिम्स में भर्ती किया गया। रिम्स में पीड़िता कोमा में है.

रिम्स की लचर स्थिति पर झारखण्ड हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार इसे मुँह नहीं फेर सकती. कोर्ट ने यह भी कहा कि हॉस्पिटल को हर साल 100 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद मिलती, लेकिन इसका उपयोग नज़र नहीं आ रहा है. कोर्ट ने प्राइवेट प्रैक्टिस करनेवाले रिम्स के डॉक्टरों पर डायरेक्टर को कार्रवाई करने को भी कहा.

Leave A Reply

Your email address will not be published.