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लोकसभा चुनाव में 26 सीट हारीं, इसलिए अब गठबंधन जनता के भरोसे लायक नहीं

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बेंगलुरु। लोकसभा चुनाव के बाद कर्नाटक की तस्वीर बदली-बदली सी है। राज्य में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन टूटने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस बीच, राज्य बीजेपी प्रमुख और पूर्व सीएम ने कहा है कि बीजेपी राज्य में जेडीएस के साथ मिलकर सरकार नहीं बनायेगी। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि दोबारा से चुनाव हों।

येदियुरप्पा का ये भी कहना था कि जेडीएस के साथ सरकार चलाना संभव नहीं है। एचडी कुमारस्वामी के लीडरशिप में 20-20 डील हुई थी, इसके तहत सरकार चलाने का अनुभव बेहद कड़वा रहा। इसलिए मैं दोबारा ये गलती नहीं करना चाहता। बीजेपी और जेडीएस में 2007 के दौरान 20-20 महीने सरकार चलाने का समझौता था। तब 20 महीने सरकार चलाने के बाद कुमारस्वामी ने त्यागपत्र नहीं दिया था। कुछ दिनों बाद बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

‘कोई दूसरा विकल्प हमारे पास नहीं’

येदियुरप्पा ने बताया, ‘हम नये विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हैं। पार्टी के पास कोई और चारा नहीं है। लोकसभा चुनावों में 26 सीट गंवाने के बाद जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन पर से लोगों का भरोसा उठ चुका है। यदि इसके बाद भी गठबंधन सरकार चलती है, तो ये लोगों की सोच के खिलाफ मानी जाएगी।

येदियुरप्पा ने आरोप लगाया कि गठबंधन के दोनों गुट यानी कांग्रेस और जेडीएस लोगों की समस्याएं सुलटाने की जगह सत्ता में बने रहने के जोड़तोड़ में ही लगे हुए हैं। अब एक जून को होने वाली बैठक में आगे की रणनीति तय होगी।

मांड्या सीट से जीतीं सुमनलता का स्वागत

यह सवाल किये जाने पर कि क्या बीजेपी सुमनलता का स्वागत करने जा रही है, येदियुरप्पा ने इस पर कहा- ‘अगर वे पार्टी में शामिल होना चाहें तो उनका स्वागत है।’ इस चुनाव में निर्दलीय खड़ी सुमनलता ने मांड्या से जेडीएस उम्मीदवार रहे कुमारस्वामी के बेटे निखिल को हराया था। जेडीएस प्रमुख और पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा भी तुमकुर सीट गवां बैठे हैं।

कर्नाटक में 2018 में विधानसभा की स्थिति देखें, तो वहां कुल सीटें 224 हैं, जबकि ११३ सीटों से बहुमत बनता है।

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