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वर्ल्ड कप : 27 साल के बाद राउंड रॉबिन फॉर्मेट की तैयारी, कोहली ने इसे माना चुनौतियों से भरा

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  • 27 साल पहले 1992 में हुए थे इस फॉर्मेट में मुकाबले
  • 44 साल के वर्ल्ड कप इतिहास में दूसरी बार ऐसे फॉर्मेट की फिर धमक
  • नये फॉर्मेट में सभी 10 टीमों को एक-दूसरे के खिलाफ उतरेंगी

ब्रिटेन में होने जा रहे वनडे वर्ल्ड कप के अभ्यास मैच होने लगे हैं। भारत का आज न्यूजीलैंड से अभ्यास मैच लंदन में होगा। मुख्य मुकाबले 30 मई से शुरू होंगे। टूर्नामेंट का इस बार फॉर्मेट राउंड रॉबिन और नॉकआउट है। 44 साल के वर्ल्ड कप इतिहास में दूसरी बार इस फॉर्मेट में मुकाबले होंगे। पहली बार 1992 में वर्ल्ड कप राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेले जाते देखने को मिले थे। उस समय भारतीय टीम सेमीफाइनल में ही नहीं पहुंची थी। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली मानते हैं कि फॉर्मेट में बदलाव के कारण अब चुनौतियां सबसे ज्यादा होंगी।

कोहली कहते हैं कि टूर्नामेंट के फॉर्मेट के मद्देनजर यह अब तक का सबसे चुनौतियों के भरा विश्व कप होने जा रहा है। इसमें सभी टीमें एक-दूसरे के काफी करीब भी दिख रही हैं। ध्यान से देखें तो पता चलता है कि 2015 के मुकाबले अफगानिस्तान जैसी टीम ने काफी मजबूत है। इसलिए एक-एक मुकाबले में अपनी क्षमता के साथ सभी को खेलने की जरूरत होगी। यह एक अलग तरह की चुनौती है, जिसमें सभी को तालमेल के साथ खेलना होगा।

भारत से ग्रुप स्टेज तक के मुकाबले इसी फॉर्मेट में हुए हैं

टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली सभी टीमें राउंड रॉबिन फॉर्मेट में एक-दूसरे के सामने खेलती हैं। पिछले दिनों खत्म हुई आईपीएल में प्लेऑफ से पहले के मैच राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेले गये थे। लेकिन अबकी बार वर्ल्ड कप में 10 टीमें उतर रही हैं। ऐसे में, इन टीमों को 9-9 मैच खेलने हैं। हर मुकाबला जीतने पर तय अंक दिये जायेंगे। इसका मतलब है कि शीर्ष-4 में रुकने वाली टीमें सेमीफाइनल के लिए जगह बनाएंगी।

इसके बाद नॉकआउट राउंड शुरू होंगे, इस तरह एक मैच हारते के साथ वह टीम दौड़ से बाहर हो जाएगी। अब अंक तालिका में नंबर-वन पर रहने वाली टीम का नंबर-4 से मुकाबला होगा और फिर नंबर-2 और नंबर-3 के बीच मुकाबला होगा। दोनों मैच की विजेता टीमें फाइनल में खेलेंगी।

इस फॉर्मेट के फायदे

  1. टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलना तय है।
  2. जब लीग के सारे मैच खत्म हो जायेंगे, तब तक ये कहना काफी कठिन है कि नॉकआउट में कौन सी टीमें जाने वाली हैं, इसलिए मैच के अंत तक रोमांच बरक़रार रहेगा।
  3. अच्छी टीम खिताब की दौड़ में रहती ही है यानी ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ की यहां कोई गुंजाइश नहीं होती।

राउंड रॉबिन फॉर्मेट के नुकसान

  • अधिक मैच होने के चलते टूर्नामेंट काफी लंबा खिंच जाता है, इसलिए नतीजे देर से आते हैं।
  • खिलाड़ियों के सामने फिटनेस और फॉर्म बनाये रखने की भी चुनौती रहती है।
  • हर तरह के स्टेडियम और मैच से जुड़े बड़े लोगों को लाना पड़ता है।
  • ग्रुप स्टेज एंड नॉकआउट फॉर्मेट में कब हुए वर्ल्ड कप के मैच

कब से कब तक फॉर्मेट

  • 1975 से 1987 तक ग्रुप स्टेज एंड नॉकआउट
  • 1992 राउंड रॉबिन एंड नॉकआउट
  • 1996 ग्रुप स्टेज एंड नॉकआउट
  • 1999 से 2003 तक ग्रुप स्‍टेज एंड सुपर सिक्‍स
  • 2007 से 2015 तक ग्रुप स्टेज एंड नॉकआउट
  • 2019* राउंड रॉबिन एंड नॉकआउट

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