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वाक़िफ़ कहाँ था ज़माना निधि के उड़ान से, MI-V5 उड़ाने वाली झारखंड की पहली लड़की

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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारे उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से

रांची: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली अमन निधि ने इतिहास रच दिया है. निधि ने बतौर फ्लाइंग ऑफिसर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट पारुल भारद्वाज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट हिना जायसवाल के साथ सोमवार को ऑल वूमैन क्रू में शामिल हो MI-17 V5 उड़ा कर झारखंड के इतिहास में अपना नाम दर्ज़ करा लिया है. निधि MI-V5 उड़ाने वाली झारखंड की पहली लड़की बन गई है.

मिडिल क्लास फैमिली से वास्ता रखने वाली निधि ने आपने माता-पिता को गौरवान्वित कर दिया है. निधि के पिता डाटा एंट्री का काम करते है तो वहीँ माता स्थानीय अस्पताल में अल्ट्रासाउंड लैब में कार्यरत हैं. पिता जीएन सहाय कहते हैं कि पता नहीं था कि उनकी बेटी की तारीफ देशभर में होगी.

निधि के पिता ने आगे बताया कि, बेटी को ज़िन्दगी में एक ही बात समझाई थी कि खेल-कूद के साथ पढ़ाई पर खास ध्यान देना चाहिए. जिसपर अमल कर बेटी आज आसमान की सैर कर रही है. रविवार की देर शाम बिटिया ने फोन पर बताया था कि वह उड़ान भरने वाली है. यह बात बताते हुए जहाँ निधि के पिता की आंखें नम थी तो वहीँ चेहरे पर मुस्कान थी. पिता को बेटी की उड़ान का तो पता था लेकिन उसकी उड़ान इतनी ऊंची होगी, इसका अंदाजा बिलकुल नहीं था. सुबह अखबार से ही पता चल गया था कि बेटी ने देश के साथ-साथ हमारा नाम भी रौशन कर दिया है.

निधि के पिता जीएन सहाय ने बताया कि निधि को बचपन से ही क्रिकेट पसंद है. झारखंड अंडर-19 क्रिकेट का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है. इसके अलावा रांची जिला सीनियर टीम से भी क्रिकेट खेली है. वहीं निधि ICSE बोर्ड के राष्ट्र स्तरीय खिलाड़ी रह चुकी है. क्रिकेट के अलावा अन्य खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेती रही है. लॉग डिस्टेंस वॉकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर ब्रोंज मेडल भी जीत चुकी है.

आज निधि देश की चौथी और झारखंड की पहली महिला है जो इंडियन एयरफोर्स की फाइटर फ्लाइंग में अपनी जगह बनाई है.

निधि ने मैट्रिक तक की शिक्षा सेक्रेट हार्ट स्कूल तुपुदाना से हासिल की है तो वहीँ मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद DPS से इंटर साइंस और लक्ष्मीबाई नेशनल स्कूल ग्वालियर से फिजिकल एजुकेशन से BPEd की चार साल का स्नातक कोर्स किया है.

फिर Fcat की परीक्षा दी और पहले प्रयास में ही सफलता हाथ लग गयी. के बाद फाइटर हेलीकॉप्टर पायलट बनने के लिए निधि को डेढ़ साल तक प्रशिक्षण करना पड़ा.

निधि के पिता ने देश के तमाम अभिभावकों को एक सलाह दिया है कि, कभी अपने बच्चों पर पढ़ाई और परीक्षा को लेकर किसी तरह का प्रेशर न बनाये.

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