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संविधान की रक्षा करने संसद पहुंचेंगे 233 आरोपी सांसद

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(ADR) एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक

नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA सरकार 2.0 में शामिल 57 मंत्रियों में से 22 (39%) मंत्रियों द्वारा दायर स्व-शपथ पत्रों के अनुसार खुद के खिलाफ आपराधिक मामलों का वर्णन किया हैं. इनमें से नए गठित किये गए मंत्रिमंडल के 16 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

गंभीर आपराधिक मामलों में आतंकवाद, देशद्रोह, आगजनी, हत्या, बलात्कार, डकैती, चोरी, सांप्रदायिक असामंजस्यता, चुनावी उल्लंघन जैसे अपहरण शामिल हैं.

छह मंत्री जिनमें प्रताप चंद्र सारंगी, बाबुल सुप्रियो, गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, अमित शाह और प्रल्हाद जोशी – ने धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे संबंधित मामलों की घोषणा की है.

तीन मंत्रियों ने,अश्विनी कुमार चौबे, नितिन गडकरी और गिरिराज सिंह ने चुनाव (IPC धारा -171H), रिश्वतखोरी, (IPC धारा – 171E) चुनाव में अवैध रूप से भुगतान और चुनाव पर अनुचित प्रभाव डालने जैसे मामलों को अपने शपथपत्र में दर्ज़ किया है.

महाराष्ट्र से भाजपा के राज्यसभा सांसद, वी मुरलीधरन, जिन्हें विदेश राज्य मंत्री और दूसरी नरेंद्र मोदी सरकार में संसदीय मामलों के लिए राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है, ने खुद के लिए हत्या (आईपीसी धारा -307) के प्रयास से संबंधित एक मामले का ज़िक्र किया है.

2019 लोकसभा में 233 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले

लोकसभा चुनाव 2019 में 539 विजेताओं में से, 233 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले को स्व-शपथपत्र में वर्णन किया हैं. यह 2009 के बाद से घोषित आपराधिक मामलों वाले सांसदों की संख्या में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

केरल के इडुक्की निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस सांसद डीन कुरियाकोस ने अपने हलफनामे में 204 आपराधिक मामले का वर्णन किया हैं. इनमें अपराध के लिए हत्या, घर पर अत्याचार, डकैती, आपराधिक धमकी जैसे मामले शामिल हैं. कांग्रेस सांसद वकील हैं और आपराधिकसांसदों के लिस्ट में 204 आपराधिक मामलों के साथ टॉप पर हैं.

2014 में लोकसभा चुनावों के दौरान किए गए विश्लेषण में 542 सांसदों में से, 185 (34 प्रतिशत) विजेताओं ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले का उल्लेख किया है, जबकि 2009 में लोकसभा चुनावों के दौरान किए गए विश्लेषण में पाया गया था कि 543 विजेताओं में से 162 (30 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामलों दर्ज़ थे.

इस बार ये संख्या लगभग 50 प्रतिशत है. लोकसभा चुनाव 2019 में 539 विजेताओं में से, 233 (43 प्रतिशत) सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज़ हैं.

गंभीर आपराधिक मामलों की बात आने पर यह आंकड़ा कहीं अधिक भयावह है, लगभग 159 (29 प्रतिशत) विजेताओं के खिलाफ इस बार बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध आदि जैसे आपराधिक मामले दर्ज़ हैं.

2014 में, 542 सांसदों में, 112 (21 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे. 2009 में, 543 विजेताओं में से 76 (14 प्रतिशत) विजेताओं ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले का वर्णन किया.

2009 के बाद से गंभीर आपराधिक मामलों वाले सांसदों की संख्या में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

नए लोकसभा सांसदों में 10 ऐसे हैं, जिन्होंने खुद के खिलाफ सजायाफ्ता मामलों का उल्लेख की है. हत्या से संबंधित घोषित मामलों (भारतीय दंड संहिता धारा -302) और 30 विजेताओं पर हत्या के प्रयास के घोषित मामले (IPC धारा -307) के साथ 11 सांसद हैं.

19 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों की का वर्णन स्व-शपथ में किया है. इनमें से तीन ने बलात्कार (IPC की धारा -376) से संबंधित और छह ने अपहरण से संबंधित मामलों का वर्णन किया है.

303 में से 301 सांसदों के हलफनामे के विश्लेषण में पाया गया है कि साध्वी प्रज्ञा के साथ 116 (39%) के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. वहीँ कांग्रेस के 52 में से 29 (57) आपराधिक मामले चल रहे हैं. अगर देखा जाये तो यहाँ BJP को कांग्रेस ने पीछे छोड़ दिया है.

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