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बिहार में चमकी बुखार से मरने वालों की संख्या 102, डॉ का कहना अस्पताल में सुविधाओं की किल्लत.

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वायरल संक्रमण एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AIS) के प्रकोप के कारण मरने वालों की संख्या रविवार को बिहार में 102 तक पहुंच गई है. मुज़फ़्फ़रपुर राज्य में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला जिला है जहाँ मरने वालों की संख्या 88 तक पहुँच गई है. रविवार को मुजफ्फरपुर के केजरीवाल अस्पताल में तीन और बच्चों की मौत हो गई, जहां अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकांश हताहतों की आयु 1-10 के बीच है.

वैशाली में 11 बच्चों की, मोतिहारी में दो और बेगूसराय में एक बच्चे की मौत हो गई.

डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी,उमस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AIS) के कारण मौतें हो रही हैं।. स्थानीय रूप से, इस बुखार को ‘चमकी’ कहा जाता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि जब तक बारिश नहीं होती है, तब तक आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AIS) के कारण मरने वाले बच्चों के परिवारों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और डॉक्टरों को बीमारी से लड़ने के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश भी दिए हैं.

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने एक समाचार संस्थान से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार संकट को रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है.

“हम मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं लेकिन इसके बावजूद मौतें हो रही हैं. हम 24 घंटे स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मुजफ्फरपुर के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है. ”मंगल पांडे ने कहा।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शनिवार को मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने उन बच्चों के परिजनों से भी मुलाकात की जिनका इलाज चल रहा है और सभी केंद्रीय और राज्य सहायता का आश्वासन दिया गया है.

नित्यानंद राय ने कहा, “मासूम बच्चों की मौत पर पूरा राज्य सदमे की स्थिति में है. हम प्रभावितों के परिवार के सदस्यों के साथ हैं और किसी भी तरह की सहायता करने के लिए तैयार हैं.”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AIS) और जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के बढ़ते मामलों के मद्देनजर वहां की स्थिति का जायजा लेने के लिए पटना का दौरा किया.

इस बीच, मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती एक मरीज के पिता ने कहा कि अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा, “डॉक्टर उचित ध्यान नहीं दे रहे हैं. हर घंटे, बच्चे मर रहे हैं. चूंकि मध्यरात्रि 12 बजे से, कोई डॉक्टर नहीं हैं, केवल कुछ नर्स ड्यूटी पर हैं.”

समाचार संस्थान TV9 भारतवर्ष की एक रिपोर्ट में हमने देखा कि अस्पताल की हालात कितनी ही जर्जर है. रिपोर्टर ने जब वहां के सीनियर डॉक्टर से पूछा कि क्या यहां डॉक्टरों की किल्लत है, पहले तो डॉ साहेब ने इधर-उधर घुमाने की कोशिश की लेकिन रिपोर्टर के ज़ोर देने पर सीनियर डॉ ने बताया कि हां यहां डॉक्टरों की किल्लत है. हर मरीज़ पर एक डॉक्टर होना चाहिए. दवाईयों की भी कमी है.

एक तरफ बिहार के स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि हम 24 घंटे स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और हर तरह के उचित सुविधायें मुहैया करा रहे हैं,लेकिन उसी अस्पताल के सीनियर डॉक्टर कह रहे हैं कि यहां डॉक्टरों की किल्लत है,सुविधाओं की कमी है.

मुख्यमंत्री साहेब ने मरे हुए बच्चों के परिवार को 4 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया है. हमारे देश में अपनी नाकामी और लापरवाही पर पर्दा डालने का बहुत अच्छा ट्रेंड बन गया है.

मुख्यमंत्री साहेब और बाकी तमाम मंत्री अगर पहले स्वास्थ्य केन्द्रों पर नज़र डालते और व्यवस्था को दुरुस्त करते तो शायद बिहार में इतने बच्चो की जाने नहीं जाती और इतने मां-बाप के चिराग न बुझे होतें.

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