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2014 में सीटें जीतने वाले 8 दलों को नहीं मिले इस बार वोट

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  1. लालू-चौटाला परिवार के मेंबर भी हारे. उपेंद्र कुशवाहा, महबूबा, दुष्यंत, मीसा हारीं
  2. राजद-रालोसपा ही नहीं, इनेलो,स्वाभिमानी पक्ष और पीडीपी को भी नहीं मिले एक भी वोट
  3. हरियाणा में चौटाला परिवार के 3 सदस्य दुष्यंत-दिग्विजय (जजपा) और अर्जुन (इनेलो) भी हारे चुनाव
  4. बिहार राज्य में लालू की पार्टी ‘राजद’ ने 2014 में 4 सीटें जीती थीं, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा को एनडीए में रहते 3 सीटें मिली थीं

नई दिल्ली. पांच साल पहले यानी 2014 के लोकसभा चुनावों में सीटों पर बाजी मारने वाले आठ क्षेत्रीय पार्टियों को इस बार एक भी सीट नहीं मिली. निराश होने वालों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की राजद, हरियाणा का इंडियन नेशनल लोकदल, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के अलावा राजू शेट्टी की स्वाभिमानी पक्ष भी हैं।

भाजपा से अलग हुए उपेंद्र कुशवाहा दोनों जगह हारे

कभी बिहार में लालू की जिस पार्टी की तूती बोलती थी, उस राजद के साथ गठबंधन में रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा खाता नहीं खोल पाई। रालोसपा ने सिर्फ 5 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये थे। कुशवाहा खुद दो सीटों पर लड़े थे, लेकिन दोनों पर वे हार गये। इस चुनाव से पहले कुशवाहा एनडीए से छिटक कर महागठबंधन में गये थे। रालोसपा ने 2014 में एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और 3 सीटों पर भी काबिज हुए थे।

लालू की बेटी-समधी हुए चित

लालू की राजद को एक भी सीट नसीब नहीं हुई। बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 19 पर उसने चुनाव लड़ा भी था। लालू की लाडली मीसा भारती पाटलिपुत्र से हार गयीं और सारण से लालू के समधी चंद्रिका राय भी चुनाव में मुंह की खा चुके हैं। 2014 में राजद 4 सीटें जीतकर आये थे।

कश्मीर के अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती की हार

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री रह चुकीं महबूबा मुफ्ती की पीडीपी एक भी सीट नहीं जीत पाई। खुद महबूबा अनंतनाग से हार गईं। यहां वे तीसरे नंबर पर आ गयीं। 2014 में उनकी पार्टी ने कश्मीर की 6 में से 3 सीटें जीतने में सफल हुई थी। लेकिन पांच साल पहले यानी 2014 में न भी सीट न जीतने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2019 में 3 सीट और भाजपा ने अपनी 3 सीटें बचा ली हैं।

चौटाला परिवार से तीन लोग हारे

हरियाणा के पूर्व सीएम देवीलाल परिवार के तीन सदस्य अबकी बार हार गये। पिछले साल अजय चौटाला के पुत्र ने इनेलो से निकल कर जननायक जनता पार्टी बनाई थी। दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला जननायक पार्टी से और अर्जुन इनेलो से चुनाव लड़े, लेकिन तीनों चुनाव हार चुके हैं। राज्य की 10 सीटों में से दोनों पार्टियां एक पर भी जीत दर्ज नहीं कर पायीं, जबकि 2014 में इनेलो ने 2 सीटें जीतीं थीं।

अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती हारीं

राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की पीडीपी एक भी सीट जीत नहीं सकी। खुद महबूबा अपनी अनंतनाग सीट से चुनाव हार गईं। यहां वे तीसरे पायदान पर रुकीं। 2014 में महबूबा की पार्टी कश्मीर की 6 में से 3 सीटें जीतने में कामयाब थी। वहीँ 2014 में खाता न खोलने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस इस बार 3 सीटों पर जीत जीत के झंडे गाड़ने में सफल रही, जबकि बीजेपी ने अपनी 3 सीटें बरकरार रखी हैं।

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