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22 जून से 24 जून 2019 तक चलेगा मां कामाख्या मंदिर में अम्बुबाची मेला, जानिए कैसे पाएं मां का प्रसाद

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हर साल की तरह इस बार भी कामाख्या मंदिर में जून के महीने में अम्बुबाची मेला मनाया जाएगा, ये मेला 22 जून से लेकर 24 जून तक मनाया जायेगा कामाख्या मंदिर में, और इस समय मंदिर में लाखों श्रद्धालु आते हैं और मां कामाख्या देवी के दर्शन करते हैं, पूजा करते है, और प्रसाद के रूप में आशीर्वाद प्राप्त करते है.

असम के नीलांचल पर्वत पर समुद्र तल से करीब 800 फीट की ऊंचाई पर यहां देवी का एक मंदिर है जिसे कामख्या देवी मंदिर कहते हैं. देवी के 51 शक्तिपीठों में से यह भी एक है. माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब देवी सती के शव को चक्र से काटा तब इस स्थान पर उनकी योनी कट कर गिर गयी.

इसी मान्यता के कारण इस स्थान पर देवी की योनी की पूजा होती है. हर साल तीन दिनों के लिए यह मंदिर पूरी तरह से बंद रहता है. माना जाता है कि माँ कामाख्या इस बीच रजस्वला होती हैं. और उनके शरीर से रक्त निकलता है. इस दौरान शक्तिपीठ की अध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है. इसलिए देश के विभिन्न भागों से यहां तंत्रिक और साधक जुटते हैं. आस-पास की गुफाओं में रहकर वह साधना करते हैं.

चौथे दिन माता के मंदिर का द्वार खुलता है. माता के भक्त और साधक दिव्य प्रसाद पाने के लिए बेचैन हो उठते हैं. यह दिव्य प्रसाद होता है लाल रंग का वस्त्र जिसे माता राजस्वला होने के दौरान धारण करती हैं. माना जाता है वस्त्र का टुकड़ा जिसे मिल जाता है उसके सारे कष्ट और विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं. इसी दौरान यहां का प्रसिद्ध अम्बुबाची मेला लगता है जिसमें देश विदेश के लोग यहां मां के दरबार में आते है.

अम्बुबाची मेला का दिन और समय

अम्बुबाची मेला हर साल की तरह इस साल भी 22 जून को प्रारंभ होगा और तीन दिन के लिए मंदिर के दरवाजे बंद किये जायेंगे, फिर जून 25 को मंदिर के दरवाजा खोला जायेंगा भक्तों के दर्शन के लिए, सभी भक्त 25 जून और 26 जून को माँ कामाख्या के दर्शन कर सकेंगे और पूजा कर प्रसाद भी प्राप्त कर सकेंगे.

कामाख्या मंदिर खुलने और बंद होने का समय

कामाख्या मंदिर रोज़ सुबह 5:30 पर खुल जाता है, और 6 बजे सुबह से आप दर्शन प्राप्त कर सकते हैं रात के 10 बजे तक, लेकिन अम्बुबाची मेले के दौरान मंदिर तीन दिन तक बंद रहता है तो आप चौथे दिन मां का दर्शन कर सकते हैं.

अम्बुबाची मेले के दौरान पूजा कैसे करें?

अम्बुबाची मेले का समय बहुत ही प्रवित्र समय माना जाता है कामाख्या मंदिर में पूजा करने के लिए, अम्बुबाची मेला तांत्रिक सिद्धियों के लिए बहुत ही उपयुक्त समय माना जाता है और ऐसी मान्यता है की इस समय भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.

अम्बुबाची मेले का प्रसाद कैसे पायें?

अम्बुबाची मेले के दौरान दो तरह से प्रसाद मिलते है एक तो होता है मंदिर का प्रसाद जो की बाहर के दुकानों पर आपको आसानी से प्राप्त हो सकता है जिसमे की लड्डू, बर्फी, पेड़े, नारियल, कलावा, सिन्दूर इत्यादि सामग्रियां होती है, और दूसरा प्रसाद वो जो की वस्त्र, सिन्दूर और जल के रूप में मिलता है

आइए हम बताते हैं की वस्त्र क्या होता है और इसकी क्या महत्ता होती है

कामाख्या वस्त्र एक सफ़ेद या लाल रंग का कपडा होता है जो की माता की मूर्ति के ऊपर चढ़ाया जाता है जो की माता की मासिक धर्म की वजह से लाल हो जाता है और जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते है दर्शन के लिए तब इसी कपडे के टुकड़े लोगो को दिए जाते है प्रसाद के रूप में और जो रक्त माता की मूर्ति से निकलती है उसी को कामाख्या जल कहते है और कामाख्या जल भी प्रसाद के रूप में लोगो को बांटे जाते है और पत्थर रुपी कामाख्या सिन्दूर भी जो की रक्त की वजह से लाल हो जाता है, दिया जाता है और ये सभी चीज़े बहुत ही उपयोगी मानी जाती हैं, लेकिन सभी लोगों को ये प्रसाद मिलना मुश्किल होता हैं.

मां की शक्ति में जो लोग विश्वास करते हैं वो यहां आकर अपने को धन्य मानते हैं. जिन्हें ईश्वरीय सत्ता पर यकीन नहीं है वह भी यहां आकर माता के चरणों में शीश झुका देते हैं और देवी के भक्त बन जाते हैं.

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