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ग्लेशियर और ध्रुवों पर 280 फीसदी तक पिघलीं बर्फ, वैज्ञानिक समाधान ढूंढने में जुटे

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ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने की वजह से दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई हैं.ग्लेशियर और ध्रुवों पर तेजी से पिघल रही बर्फ को जमाना है. जिसके लिए लगातार जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन होते रहते हैं कि कैसे लगातार पिघल रहें बर्फ को जमाया जाएँ.

धरती पर लगातार बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के कारण फसलें भी प्रभावित होती हैं. जिसकी वजह से फसलों के उत्पादन में लगातार कमी आ रही हैं. ग्लोबल वॉर्मिंग का असर बरसात के मौसम पर भी नज़र आ रहा हैं.

ग्लेशियरों को पिघलने से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने नई तरकीब निकाली है, इसके तहत समुद्र में 980 फीट ऊंची एक धातु की दीवार बनानी होगी. जो कि पहाड़ के नीचे मौजूद गरम पानी को ग्लेशियरों तक पहुंचने नहीं देगी. जिसकी वजह से हिमखंड टूटकर समुद्र में नहीं गिरेगें.

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया कि 0.1 क्यूबिक किलोमीटर से 1.5 किलोमीटर तक धातु लगेगी. अरबों रुपए खर्च होने का अनुमान है.

इसलिए वैज्ञानिकों ने हिमखंड से पिघल रही बर्फ को रोकने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए प्राकृतिक तरीका ढूंढा हैं.

वैज्ञानिक कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन विधि द्वारा कार्बनडाईऑक्साइड (CO2) को रिसाइकिल करने की योजना बना रहे हैं. इससे निकलने वाली उर्जा के द्वारा बिजली भी बनाई जा सकती है.

इसके अलावा वैज्ञानिक धरती पर आने वाली सूरज की बेहताशा गर्मी को कम करने में जुटे हैं. इसके लिए वैज्ञानिकों का ध्रुवीय क्षेत्रों के बादलों को चमकदार बनाने की योजना है. इससे धूप से पैदा होने वाली गर्मी धरती से रिफ्लेक्ट होगी.

वैज्ञानिक समुद्रों की वनस्पतियों को विकसित करेंगे. ताकि वह ज्यादा मात्रा में कार्बनडाईऑक्साइड को प्राप्त कर सकें. इससे समुद्री जीवों को भी पर्याप्त मात्रा में भोजन मिलेगा.

ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्लेशियर की बर्फ लगातार पिघल रही हैं. जिसकी वजह से कहीं बाढ़ तो कहीं cyclone का खतरा बना हुआ हैं.

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