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30 साल पुराने मामले में पूर्व IPS संजीव भट्ट को अदालत ने सुनाई उम्र कैद की सजा

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गुजरात में जामनगर की अदालत ने पूर्व IPS संजीव भट्ट को 1990 में हुई एक व्यक्ति की मौत का दोषी करार करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई हैं. संजीव भट्ट ने अपनी सफाई में कुछ हफ्ते पहले अदालत में याचिका दी थी जिसमें संजीव अपने ऊपर लगे आरोप में कई नए गवाहों को अदालत के सामने पेश करना चाहते थे. लेकिन अदालत ने संजीव भट्ट की याचिका को ख़ारिज कर दिया.

संजीव भट्ट की याचिका को ख़ारिज करने का एक कारण यह भी था कि 30 साल पुराने इस मुक़दमे की सुनवाई 20 जून को होनी थी. इससे पहले भी गुजरात सरकार व अभियोजन पक्ष की दलील को माना था और सभी गवाहों को पेश किया गया था, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. ऐसे में अब दोबारा से मुक़दमे पर सुनवाई करना केवल केस की तारीख को आगे बढ़ाना था.

क्या है 30 साल पुराना मुकदमा

1990 के दौरान गुजरात में दंगे हुए थे. उस समय IPS संजीव भट्ट अपने कार्य पर कार्यरत थे. संजीव और उनकी टीम ने जामनगर में भारत बंद के समय हुई हिंसा में पुलिस ने करीब 133 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें से लगभग 25 लोग घायल और 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. हिरासत से लोगों को मुक्त करने के बाद इनमें से एक व्यक्ति प्रभुदास वैष्णानी की अस्पताल में मौत हो गयी थी. हिरासत के दौरान उनकी पिटाई की गई थी. इसलिए मृतक प्रभुदास वैष्णानी के भाई अमृत वैष्णानी ने इस मामले को लेकर संजीव भट्ट सहित अन्य 8 पुलिसकर्मियों को आरोपी मानते हुए उन् पर केस दर्ज़ कर दिया था.

संजीव भट्ट के साथ- साथ एक अन्य आरोपी कांस्टेबल प्रवीण झाला को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है. गुजरात पुलिस ने 5 सितंबर 2018 को पूर्व IPS संजीव भट्ट को हिरासत में लिया था. भट्ट को 1998 में एक आपराधिक मामले में झूठे तरीके से एक वकील को फंसाने के लिए जुड़े मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था.

संजीव भट्ट पर इसके अलावा कई अन्य केस भी दर्ज़ हैं. संजीव भट्ट को बिना किसी मंजूरी के  अपनी जॉब से अनुपस्थित रहने और सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग करने पर 2011 में निलंबित कर दिया गया था. 2015 में IPS संजीव भट्ट को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया.

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