Ultimate magazine theme for WordPress.

इस्माइल ने 20 रुपए नहीं चुराए, यह साबित करने के लिए उसे लड़नी पड़ी 41 साल की कानूनी लड़ाई

0

अंग्रेजी में एक कहावत है, ‘justice delayed is justice denied’. इसका मतलब है कि, न्याय में देरी यानी न्याय से वंचित है. जो कि हमारे देश की न्याय व्यवस्था पर बिल्कुल फिट बैठता है. हमारी न्यायिक प्रणाली की दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता यह है कि, लंबित मामले की संख्या और उन्हें संबोधित करने के लिए न्यायाधीशों की कमी के कारण, कोर्ट में फसें मामले अक्सर लंबे समय तक धूल फांकते रह जाते हैं.

मामलों को अक्सर सालों तक खींचा जाता है और कभी-कभी दशकों तक, जो वास्तव में प्राकृतिक न्याय को दूर कर देता है.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रहने वाले 69 वर्षीय इस्माइल खान के साथ ठीक ऐसा ही हुआ. यह सब 1978 में शुरू हुआ जब एक बाबूलाल नामक एक व्यक्ति ने बस टिकट खरीदने के लिए एक कतार में खड़े होने के दौरान अपनी जेब से 20 रुपये चोरी करने का आरोप इस्माइल पर लगाया.

बाबूलाल की शिकायत के आधार पर इस्माइल खान को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया लेकिन कुछ महीनों के बाद जमानत पर वो जेल से बाहर आ गए.

लेकिन यह तो सिर्फ इस्माइल की शुरुआत थी. अगले तीन दशकों तक, इस्माइल को जब भी अदालत ने बुलाया, अपने आप को बेगुनाह साबित करने की पुरज़ोर कोशिश की. और हर सबूत अदालत में दिखाते रहे, लेकिन मामला कहीं नहीं गया और ऐसे ही घसीटता रहा.

2004 में उन्होंने सुनवाई के लिए अदालत जाना बंद कर दिया. इसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2019 में उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया, जिसके आधार पर खान को गिरफ्तार किया गया और जेल भेज दिया गया.

लेकिन इस बार इस्माइल खुशनसीब साबित हुआ क्योंकि मामला एक लोक अदालत में सुनवाई के लिए आया, जहां न्यायाधीश ने कहा कि मामला लंबे समय से खींच रहा है और उसे चोरी के आरोपों से बरी कर दिया गया.

ऐसा नहीं है कि इस्माइल का मामला एकलौता मामला था, पिछले हफ्ते ही एक और ऐसी घटना सामने आई थी जहां दिल्ली के एक दंपत्ति ने तलाक़ के लिए अर्जी दी थी, जिसे 24 साल बाद तलाक अर्जी पर हरि झंडी दिखाई गयी.

दंपति, एक वरिष्ठ सरकारी कर्मचारी है और दूसरे सरकारी डॉक्टर ने 1988 में शादी की थी और 1995 में पति ने तलाक की अर्जी दाखिल थी.

अदालती इतिहास में न जाने ऐसे कई मामले अब भी बेगुनाही साबित करने के लिए इंतज़ार में हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.