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त्रिपुरा के दो जिलों के कम से कम 10,000 लोगों को बेघर होना पड़ा.

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राज्य के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि त्रिपुरा के दो जिलों के कम से कम 10,000 लोगों को बेघर होना पड़ा और पिछले दो दिनों से लगातार बारिश के कारण बाढ़ राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ रही थी.

आपदा प्रबंधन के राज्य परियोजना अधिकारी शरत दास ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के कर्मियों और राज्य की सुरक्षा बलों ने खोवाई और पश्चिम त्रिपुरा जिलों से कई फंसे हुए लोगों को बचाया.

लगभग 8,000 और 2,000 लोगों ने पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिलों में सरकारी भवनों और स्थानीय क्लबों में शरण ली थी, जहाँ प्रशासन द्वारा अस्थायी राहत शिविर खोले गए थे.

दास ने पीटीआई भाषा से कहा, “बाढ़ और बचाव दल को स्थिति से निपटने के लिए तत्परता से रखा गया.

उन्होंने कहा, पूर्वानुमान लगाया गया है कि, सोमवार को बारिश के साथ गर्जन भी होगी.

सदर के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) आशिम साहा ने कहा, “हमने बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पानी और दवाओं की व्यवस्था की है.” सदर उप-मंडल पश्चिम त्रिपुरा जिले में पड़ता है.

मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा, “हमारी सरकार त्रिपुरा में भारी बारिश की स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है और अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं … किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, राज्य आपदा वालंटियर्स और पुलिस व्यक्ति मौजूद हैं.”

अगरतला शहर और उसके आसपास के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में श्रीलंका बस्ती, बलदाखल, अंबेडकर कॉलोनी, प्रतापगढ़ शामिल हैं जो हावड़ा नदी के करीब हैं.

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