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पूर्व भाजपा MP दीनू सोलंकी को RTI कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के दोष में आजीवन कारावास

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भाजपा के पूर्व सांसद दीनू सोलंकी और छह अन्य को गुरुवार को आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, एएनआई ने बताया.

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सभी अभियुक्तों – सोलंकी, उनके भतीजे शिवा सोलंकी, संजय चौहान, शैलेश पंड्या, पचन देसाई, उडाजी ठाकोर और पुलिस कांस्टेबल बहादुरसिंह वडर को दोषी पाया.

20 जुलाई 2010 को गुजरात हाईकोर्ट के बाहर दो हमलावरों द्वारा गिर के जंगल में अवैध खनन गतिविधियों को उजागर करने के लिए की जेठवा गोली मारकर हत्या कर दी थी.

गोलीबारी के बाद दोनों हमलावर अपने दोपहिया वाहन और एक देसी रिवाल्वर को मौके पर छोड़कर भाग गए.

आज 9 साल बाद सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सभी अभियुक्तों को आईपीसी धारा 302 (हत्या), 201201 (अपराध के साक्ष्य के गायब करने के लिए ) ,120 बी (अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश) और धारा 25 (1) आर्म्स एक्ट (हथियारों या गोला-बारूद का अवैध कब्जा) के तहत दोषी पाया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई.

बता दें कि, सोलंकी को RTI कार्यकर्ता की हत्या में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में CBI द्वारा आरोप पत्र सौंपा गया था. CBI ने स्थापित किया कि जेठवा को सोलंकी के इशारे पर मार दिया गया क्योंकि गिर के जंगल के निषिद्ध क्षेत्रों में सांसद को शामिल करते हुए अवैध खनन गतिविधियों को प्रकाश में जेठवा द्वारा लाया गया था.

हत्या के मामले की जांच पहले अहमदाबाद डिटेक्शन क्राइम ब्रांच (DCB) द्वारा की गई थी, जिसमें छह व्यक्तियों – शिवू सोलंकी, दीनू सोलंकी, शैलेश पंड्या, बहादुरसिंह वढेर, पंचान जी देसाई, संजय चौहान और उडजी ठाकोर के भतीजे थे। लेकिन डीसीबी ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी.

जेठवा के पिता भीखाभाई जेठवा ने तब गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और याचिका दायर कर CBI से निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

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