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BSNL के कर्मचारियों ने अपनी कंपनी के लिए PM मोदी को लिखा पत्र

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BSNL के कर्मचारियों ने PM मोदी को पत्र लिखा और उनसे आग्रह किया है कि BSNL कंपनी को फिर से खड़ा किया जाना चाहिए. कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी पर किसी भी प्रकार का कोई लोन नहीं है और कंपनी को लगातार मुनाफा हो रहा है. ऐसे में BSNL को एक बार फिर से मुनाफे वाली कंपनियों में शामिल करना चाहिए. कंपनी में उन कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिये जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं.

AIGETOA द्वारा लिखा गया पत्र

AIGETOA- ऑल इंडिया ग्रैजुएट इंजीनियर्स एंड टेलीकॉम ऑफिसर्स असोसिएशन ने 18 जून को PM मोदी को पत्र लिखकर कंपनी के नकदी संकट को दूर करने के लिए बजट समर्थन दिए जाने का आग्रह किया. AIGETOA का कहना है कि नकदी संकट की वजह से कंपनी का परिचालन प्रभावित हो रहा है. पत्र में कहा गया है कि, ‘हमारा मानना है कि मौजूदा नकदी संकट को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाले न्यूनतम समर्थन से भी BSNL को एक बार फिर से मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शामिल किया जा सकता है.’

एसोसिएशन ने कंपनी से मांग की है कि BSNL कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों में से जो कर्मचारी अच्छा काम करते हैं उन्हें पुरस्कार या इनाम देना चाहिए और जो कर्मचारी कंपनी के लिए सही काम नहीं करते कंपनी को उनसे जवाब मांगना चाहिए.

BSNL के पास फंड कम

दरअसल, इस समय कंपनी के पास फंड की कमी हैं जिसकी वजह से कंपनी अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैं.

MTNL और BSNL दोनों कंपनी 2010 से घाटे में

किसी समय पर संचार की सबसे ज्यादा प्रसिद्ध कंपनी MTNL और BSNL दोनों ही अब घाटे की कगार पर हैं. 2010 से इन दोनों कंपनियों में गिरावट आना शुरू हो गया. MTNL इस समय दिल्ली और मुंबई में तथा BSNL केवल 20 दूरसंचार शहरों में परिचालन करती हैं. कर्मचारियों और अधिकारियों की एसोसियेशन ने कहा कि कठिन परिस्थितियों आने के बावजूद भी BSNL आत्मनिर्भर है और उस पर कोई लोन का बोझ नहीं है. BSNL की दूसरी दूरसंचार कंपनियों से स्थिति अलग है अन्य कम्पनियां भारी लोन के चक्कर में दबी हैं.

PM मोदी को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि BSNL कभी भी अपने कर्मचारियों का वेतन देने में पीछे नहीं रही है. केवल एक महीने ऐसा हुआ है लेकिन तब भी कंपनी ने अपने खुद के संसाधनों से बिना किसी बाहरी समर्थन के परिचालन को व्यवस्थित रखा था.

कंपनी के घाटे की बात करें तो वर्ष 2017 में कंपनी को 4,786 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. वहीं 2018 में यह बढ़कर दोगुना 8 हजार करोड़ रुपये हो गया. 2019 में इसके और ज्यादा होने की संभावना है.

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