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बिहार में ‘चमकी’ बुखार की वजह लीची नहीं बल्कि कमजोरी और कुपोषण है: एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विद्यापति

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बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम जिसे स्थानीय भाषा में चमकी भी कहा जाता है, से बीते एक हफ्ते में 128 से भी ज्यादा बच्चों की जानें जा चुकी हैं. लेकिन हो रही मौत के पीछे की असल वजह सामने नहीं आ पायी हैं, हालाकिं रह-रह कर नई-नई वजहें बताई जा रही हैं, जैसे खली पेट में लीची खाना, खून में अचानक शुगर की कमी होना. लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक या ठोस वजह नहीं मिल पायी है.

इसी बीच रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विद्यापति ने एक समाचार संसथान से बात करने के दौरान कहा कि, एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम का लीची से कोई नाता नहीं है. यह मूलत: वायरल संक्रमण है और इसका संक्रमण कुपोषित बच्चों में तेजी से फैलता है. उन्होंने यह भी बताया कि जो बच्चे कमजोर और कुपोषित होते हैं, जिनका उम्र के हिसाब से वजन कम होता है और जिसका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वह AIS के संक्रमण की चपेट में जल्दी आता है.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि खाली पेट लीची खाने या फिर लीची खाने से AIS की चपेट में आ रहे हैं, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि लीची का इस बीमारी से कोई संबंध है ही नहीं. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर इलाके में आज कोई नया लीची का उत्पादन नहीं हो रहा है. यह बरसों पहले से है और केवल मुजफ्फरपुर के ही लोग या बच्चे लीची खाते हैं, ऐसा भी नहीं है. मुजफ्फरपुर की लीची को हर साल देश के कई इलाके के लोग खाते हैं, मगर चमकी बुखार का शिकार केवल मुजफ्फरपुर के ही बच्चे हो रहे हैं, सोचनीय है. इस पर शोध होने की जरूरत है.

बता दें कि, बिहार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले रविवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल हाइपोग्लाइकेमिया के कारण सबसे अधिक मौतें हुई हैं. लेकिन सरकारी अधिकारियों ने यह स्वीकार करने से परहेज किया है कि हाइपोग्लाइकेमिया उन दर्जनों बीमारियों में से एक है जो AES की छत्रछाया में आते हैं. हाइपोग्लाइकेमिया बच्चों में रक्त शर्करा का खून में शुगर की अत्यधिक कमी हो जाती है.

AES की पहचान 1995 में पहली बार मुजफ्फरपुर में की गई थी. तब से, यह बीमारी हर साल प्रहार करती रही है लेकिन अभी तक इसके मूल कारणों का पता नहीं चला है. हालांकि, जर्नल साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित एक पेपर के अनुसार, 135 मामलों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने खाने की आदतों, जीवन शैली, आर्थिक स्थिति, जाति की पृष्ठभूमि और इसी तरह के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले. लेकिन बीमारी के पीछे का वास्तविक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है.

Determinants of Acute Encephalitis Syndrome (AES) in Muzaffarpur District of Bihar (बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर जिले में तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) के निर्धारक) ’नामक शोध पत्र में अध्ययन किए गए मामलों में से 123 मामलों में प्रभावित बच्चे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़े वर्ग के थे. 100 मामलों में बच्चों के परिवार अनपढ़ पाए गए. 114 बच्चों के परिवारों के लिए खेती को आजीविका का स्रोत माना गया.

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