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अब तक 40 मौत हो चुकी है चमकी बुखार, ऐसे करें अपने परिवार का बचाव.

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अब तक तेज़ी से 40 बच्चों की जानें ले चुका है चमकी बुखार। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इन दिनों चमकी बुखार कहर बरपा रहा है. इस खतरनाक बुखार की चपेट में आए अब तक करीब 14 मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं. वहीं, 38 की नाजुक हालत बनी हुई है. सिर्फ 10 जून के आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में एसकेएमसीएच में 44 बच्चे भर्ती किए गए. जिनमें से 25 बच्चों की मौत हो गई. डॉक्टरों के मुताबिक इस बुखार से पीड़ित और मरने वाले सभी बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच की है.

आखिर क्या है चमकी बुखार?

हिंदी में चमकी बुखार और अंग्रेज़ी में इसे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम कहते है. जब मुजफ्फरपुर के जिला अस्पताल के डॉक्टर्स से पूछा गया कि, आखिर ये मौते क्यों हो रही है तो डॉक्टर्स पहले तो चुप रहे, लेकिन बाद में उनका जवाब था कि, इसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए केंद्रीय टीम मुज़फ्फरपुर पहुंची हैं. केंद्रीय बाल आयोग के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी एसकेएमसीएच पहुंची हैं. वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम मामले की जांच कर रही है. हम हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि अब एक भी बच्चे की जान ना जाए.

खतरनाक आकड़ें

एसकेएमसीएच के आंकड़ों के मुताबिक इस बीमारी से साल 2012 में सबसे ज्यादा 120 मौतें हुई. साल 2013 में 39, साल 2014 में 90, फिर साल 2015 में 11, उसके अगले साल यानी कि 2016 में 4 मौतें, वहीं साल 2017 में 11 मौतें जबकि पिछले साल 7 बच्चों की जान गई थी. लेकिन साल ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं.

चमकी बुखार के लक्षण

लगातार तेज बुखार चढ़े रहना, बदन में लगातार ऐंठन होना, दांत पर दांत दबाए रहना, सुस्ती चढ़ना, कमजोरी की वजह से बेहोशी, चिउंटी काटने पर शरीर में कोई गतिविधि न होना.

उपचार

ध्यान रहे कि, शरीर में पानी की कमी ना हो. साथ ही बाहर के खाने से बचें तथा हेल्दी फ़ूड ही खाये। खाने बाद कुछ ना कुछ मीठा ज़रूर खाये, क्योंकि चमकी ग्रस्त बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर की कमी देखी जा रही है. फिलहाल जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

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