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हिन्दुस्तान की राजनीति का सबसे बड़ा बाग़ी नेता, कभी समाजवाद के पुरोधा के पसीने छुड़ा दिए थे.जानिए एक बाग़ी प्रधानमंत्री की अनकही कहानी.

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आज खबर नहीं आपको किस्सा बताते हैं, वो एक ऐसे शख्स थे जिनका खौफ देश के बड़े बड़े हुक्मरानों के मन में घर कर गया था. खौफ तो ऐसा कि ये शख्स देश का प्रधानमंत्री बनना चाहता है. उन्होंने ज़िन्दगी में लाल बत्ती नहीं ली, वो बस सांसद रहे और मंत्री पद को लगातार ठुकराते है और जब बने तो सीधा प्रधानमंत्री. वो शख्स बलिया के चंद्रशेखर सिंह थे.

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की आज पुण्यतिथि है.8 जुलाई 2007 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका देहांत हो गया था. चन्द्रशेखर का जन्म 1 जुलाई 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित इब्राहिमपत्ती गांव के एक किसान परिवार में हुआ था.

उस दौर में चंद्रशेखर अपने बेबाकपने के लिए जाने जाते थे, अपनी बातों रखने के समय वो इस बात का ज़रा भी ख्याल ने करते थे कि सामने कौन है. सामने चाहे कितना बड़ा ही नेता, मंत्री क्यों न हो चद्रशेखर खुल कर अपनी बात बोलते थे. साथ ही वो विद्वान लेखक और बेबाक समीक्षक भी थे.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1950-51) से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री करने के बाद वे समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए.

1962 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए

चंद्रशेखर ने 10 नवंबर 1990 को प्रधानमंत्री का पदभार संभाला, लेकिन वो 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और सिर्फ 8 महीनो के लिए ही प्रधानमंत्री पद पर विराजे रहे.

हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपने राजनीतिक जीवन में कई राजनीतिक पार्टी का दामन थामा लेकिन उनका बाग़ीपन जारी रहा. शुरुआत हुई 1951 में सोशलिस्ट पार्टी से जिसके वो फुल टाइम वर्कर बन गए.सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख राम मनोहर लोहिया से भी लगातार कई मुद्दों बार उठापटक जा रहती थी. जब सोशलिस्ट पार्टी में दरार आयी तो चंद्रशेखर ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया.

मगर चंद्रशेखर के बगावती तेवर कांग्रेस में भी जारी रहा. 1975 में जब इमरजेंसी लगी तो चंद्रशेखर उन कांग्रेसी नेताओं में से एक थे, जिन्हें विपक्षी दल के नेताओं के साथ जेल में डाल दिया गया. इमरजेंसी ख़त्म होने के बाद, चंद्रशेखर वापस आए और जनता पार्टी के अध्यक्ष बने.

वे 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे। इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था. आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था। फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ. वे इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे.

1990 में जब चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तो उसके पीछे वजह यह थी कि विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार
से बीजेपी ने अपना सपोर्ट वापस ले लिया जिसके चलते पार्टी अल्पमत में आ गई. चंद्रशेखर के नेतृत्व में जनता दल टूट गयी. एक 64 सांसदों का धड़ा अलग हो गया और उसने सरकार बनाने का दावा ठोंक दिया. पार्टी को समर्थन मिला राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी से.

प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर ने पद संभालते ही कांग्रेस के हिसाब से चलने से मना कर दिया. सात महीने में ही राजीव गांधी ने हाथ पीछे खींच लिया यानी अपना सपोर्ट वापस ले लिया.

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