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झारखंड के चरही में आज भी नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चें

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देश को आजाद हुए 70 साल से भी ज्यादा हो चुके हैं लेकिन देश के कई हिस्सों में आज भी छात्रों को तालीम हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है. झारखंड के चरही में ऐसे ही स्कूल तक पहुंचे के लिए छात्र-छात्राओं को हर रोज नदी पार करना पड़ता है.

चुरचू प्रखंड के चरही सरबाहा के तरिया टोला के कई बच्चे हर दिन ढेबागढ़ा नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं. बरसात का मौसम है, बारिश की वजह से नदी में पानी बढ़ गया है, जिसके चलते देश के भविष्य (बच्चे) तरिया, कंबाटांड़, सरबाहा होते हुए लगभग सात किलोमीटर की दूरी तय कर के चरही स्थित स्कूल जाते हैं.

जब नदी में पानी का स्तर बढ़ जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन हो जाती है तो बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं यानि स्कूल जाना छोड़ देते हैं और घर बैठे पानी का स्तर कम होने का इंतज़ार करते हैं. ताकि नदी में पानी कम हो और हम नदी पार कर के स्कूल जा सकें.

वहीं, नदी के पूर्वी छोर पर स्थित पोडोकोचा गांव के ग्रामीणों सहित विद्यार्थियों को भी नदी के ऊपर पुल नहीं बनने की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. यहां नदी पार कर शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों को लगभग चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है़ तब जा कर वो स्कूल पहुंच पाते हैं.

बताया गया कि, तरिया टोला के रहने वाले लोग पिछले 20 वर्षों से ढेबागढ़ा नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं. जिला परिषद सदस्य अग्नेशिया सांडी पूर्ति ने पुल बनाने की अनुशंसा की थी.

जानकारी के मुताबिक, मार्च महीने में REO के जूनियर इंजीनियर सुभाष कुमार पुल निर्माण स्थल पर आए उन्होंने अपने हिसाब से मापी कर सभी जानकारी अपने साथ ले भी गए, लेकिन इसके बाद उनका कोई आता मिला न पता. बस गांव वालों के आंखों में एक उम्मीद छोड़ गए.

गांव वाले अब भी इंतज़ार में हैं कि एक रोज़ पूल बनेगा और बच्चे उस नदी के ऊपर से सीना ताने हुए विद्या के मदिर तक पहुंचेंगे, लेकिन आज भी परिस्थिति वहीं बानी हुई है जो 20 साल पहले बनी हुई थी. आज भी बरसात के मौसम में बच्चों को स्कूल नदी पार कर जाना होगा और जब पानी का स्तर बढ़ जायेगा तब बच्चे स्कूल छोड़ घर बैठ जायेंगे.

एक तरफ देश के प्रधानमंत्री देश को विश्व गुरु बनाने की बात करते हैं, दूसरी तरफ उसी राज्य में जहां BJP की सरकार है बच्चे नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं. एक तरफ हम चाँद पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, दूसरी तरफ उसी देश के माएं अपने बच्चों को हर रोज़ सुबह नदी पार कर स्कूल जाने के लिए तैयार करती हैं.

अगर ऐसे ही नदी पार कर स्कूल जायेगा इंडिया तो भला कैसे आगे बढ़ेगा इंडिया ?

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