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झारखंड कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार को पद से मुक्त किया जा सकता हैं, दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय से मिले संकेत.

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लोकसभा चुनाव में हार के बाद अभी भी उठापटक जा रही है. राहुल गांधी के कांग्रेस प्रमुख के पद से इस्तीफा देने के बाद से पार्टी के कई पदाधिकारियों का एक के बाद एक इस्तीफे हो चुके हैं, तो वहीँ कुछ नेताओं को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है.

अभी लग ही रहा था कि शायद अब इस्तीफे की आंधी शांत हो गयी तभी पार्टी के अंदर से खबर आने लगी कि CWC टीम के बड़े नेताओं ने झारखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार को पद से हटाने की बात कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि लगातार उनके खिलाफ आ रही शिकायतों पर नज़र डाला गया है और हो सके तो उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा जाएगा.

झारखंड में कांग्रेस की करारी हार के बाद प्रदेश से कई बड़े नेता और कार्यकर्ता डॉ. अजय कुमार के खिलाफ बगावती सुर लिए दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित AICC दफ्तर पहुंचे थे और पार्टी के थींक टैंकरों से मुलाक़ात कर डॉ. अजय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने के लिए दवाब बनाया था.

झारखंड से दिल्ली आए कांग्रेसी नेताओं का कहना था कि, डॉ. अजय कुमार कांग्रेस में रह कर दूसरे पार्टी को जिताने का काम कर रहे हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान संगठन में जान फूंकने के बजाय अपनी मजबूती में लगे रहे. यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार मिली साथ ही उनके नेतृत्व में मामूली चुनाव नहीं जीता जा सकता तो विधानसभा तो दूर कि बात है. पार्टी की बेहतरी इसी में है कि, पार्टी डॉ. कुमार को पद से हटाए और किसी झारखंड के सीनियर लीडर को कांग्रेस का मुखिया बनाए ताकि सभी लोग उनके साथ खड़े हो सकें.

सूत्रों की मानें तो यह भी बताया कि, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के साथ ही पुरे टीम को बदला जायेगा और आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए झारखंड में नई टीम का गठन किया जायेगा.

बता दें की झारखंड में कुल 14 लोकसभा सीट हैं और इस लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी शिकश्त मिली. जहां NDA को 14 में से 12 सीटें मिली तो वहीँ महागठबंधन को 14 में से मात्र 2 सीटें ही मिली.

हाल ही में झारखंड से कुछ सीनियर लीडर आए थे जिन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ डॉ. अजय कुमार को लेकर एक गुफ्त मीटिंग भी की थी. और उसी मीटिंग से ये धुआं उठा कि, कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह समेत आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए झारखंड में बहुत ही जल्दी और बहुत बड़े बदलाव दिखेंगे.

इधर पार्टी में लगातार खुद को घिरते देख कुछ दिन पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा की तारीफ करनी शुरू कर दी थी और कांग्रेसी नेताओं को भाजपा से कुछ संस्कार सिखने को कहा था.

झारखंड के कई नेता तो अब कहने लगे है कि हो सकता है इस बात की भनक अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को भी लग गई होगी इसलिए शायद उन्होंने भी पार्टी के अंदर बगावती बिगुल फूंक दिए हैं. और यह भी हो सकता कि भाजपा कि तारीफ इसलिए कि जा रही हो ताकि जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को मजबूर किया जाए तो वह भाजपा में शामिल हो जाएं.

बहरहाल संसद सत्र की समाप्ति के ठीक बाद झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र की चुनावी योजना पर बैठक होने वाली है. जिसमें ये तय हो जाएगा कि झारखंड कांग्रेस, किसके सहारे आनेवाले विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरेगी.

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