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UP: दलितों को गांव में नहीं है पूरी आजादी, उच्च वर्ग से मानते हैं खतरा

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एक तरफ जहां देश विकास की ओर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां दलित वर्ग अभी भी अपने आप को उच्च वर्ग से खतरा मानते हैं.

खासकर कर जब दलित वर्ग किसी भी उच्च वर्ग के इलाके से कोई काम करता है. ऐसी ही एक कहानी है UP के कासगंज के निवासी संजय और शीतल की.

दरअसल, संजय और शीतल की शादी पिछले साल हुई थी, दोनों की शादी को एक साल हो गया है. संजय और शीतल दलित वर्ग से हैं. पिछले साल संजय ने 15 जुलाई को पूरे समूह के साथ अपनी बारात ठाकुरों के गांव से निकाली थी. जिस पर काफी विरोध किया गया था.

विरोध के कारण संजय और शीतल की शादी पुलिस सुरक्षा के बीच हुई थी. संजय और शीतल का कहना है कि उनकी शादी को 12 महीने हो चुके हैं लेकिन इसके बाद भी उन्हें गांव के ठाकुरों से खतरा महसूस होता है.

संजय ने बताया कि उनके इलाके से बारात ले जाने के बाद, ठाकुरों के आत्म- सामना को ठेस पहुंची है, इसलिए उन्हें हमेशा अपने साथ या अपनी बीवी शीतल के साथ, अपने ससुराल वालों के साथ कही कुछ हो न जाए, इस बात का खतरा महसूस रहता है.

इसके अलावा अभी हाल ही में साक्षी मिश्रा और अजितेश की शादी का मामला भी सामने आया था. जिसमें अजितेश के दलित होने के कारण साक्षी ने कहा था कि उन्हें अपने पिता से खतरा है.

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आजादी के इतने साल बाद भी देश में धर्म, जाति को लेकर भेदभाव नजर आता है तो हम यह किन आधारों पर कह सकते हैं कि देश बदल रहा है. क्या केवल चांद तक पहुंच जाने से देश बदल जाएगा या इसके अलावा लोगों को अपनी मानसिकता में भी बदलाव लाना होगा ?

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