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एक तरफ हम चाँद पर जाने को तैयार हैं, दूसरी तरफ गुजरात में सेप्टिक टैंक में 7 लोगों की मौत.

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इसरो ने चंद्रयान मिशन-2 की लॉन्चिंग की तारीख का ऐलान कर दिया है. 15 जुलाई को यह मिशन रवाना होगा. इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत चांद पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. हर तरफ भारत के इस कदम की तारीफ की जा रही है. वैसे तो बात सच में काबिल-ए-तारीफ है. लेकिन इस भारत का एक और चेहरा ये भी है.

गुजरात, प्रधानमंत्री मोदी का घरेलू राज्य, जहां से देश के कई बड़े और ताकतवर लोग आते हैं. उसी गुजरात के दाभोई स्थित दर्शन होटल के बाहर शनिवार को एक सेप्टिक टैंक में दम घुटने से 7 लोगों की जान चली गई, जिसमें तीन होटल कर्मचारी भी शामिल थे.

हादसे की जानकारी मिलने के बाद दाभाई पुलिस और फायर सर्विस के अधिकारी टैंक से उनके शव को लेने के लिए मौके पर पहुंच गए.

एक समाचार संस्थान के मुताबिक, होटल के तीन कर्मचारियों की पहचान अजय वसावा (24), विजय चौहान (22) और सहदेव वसावा (22) के रूप में की गई है. वहीं, इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले चार अन्य सफाईकर्मी थे जो दाभोई के थुवानी के रहने वाले थे.

इस मामले में पुलिस ने होटल के मालिक अब्बास भोरानिया के ख़िलाफ़ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. लेकिन फिलहाल होटल के मालिक अब्बास भोरानिया की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है.

दाभोई डिविजन के पुलिस उपाधीक्षक कल्पेश सोलंकी ने कहा, चार सफाईकर्मियों को सफाई की जिम्मेदारी दी गई थी, हमारा मानना है कि उनमें से एक टैंक में घुसा और किसी तरह की गैस लीक के कारण बेहोश हो गया. जब वह बाहर नहीं आया तब दूसरे उसे देखने उतर गए और उनका भी वही हाल हुआ. उनमें से तीन खुद होटल के कर्मचारी थे. हम इसकी जांच कर रहे हैं कि असल में कौन सी गैस थी और हुआ क्या था.

हम चांद पर पहुँच गए. बुलेट ट्रेन को ज़मीन पर लाने की तैयारी की जा रही है. स्मार्टफ़ोन के मामले में भारत सबसे आगे पहुच गया है. शहरों को स्मार्ट शाहर बनाया, भारत डिजिटल हो रहा है, हर तरफ़ विकास की बात सुनाई पड़ रही है. लेकिन वहीं हमारे समाज में कुछ ऐसे लोग हैं जो इस मॉडर्न और डिजिटल होते समाज मे अब तक गटर में अपनी जान गवा रहे हैं.

चलिए आपको कुछ आंकड़ों के जरिए समझाते है.

सफाई कर्मचारी आंदोलन – मैनुअल स्कैवेंजर्स के विकास के लिए काम करने वाली एक संस्था के आधिकारिक सर्वेक्षण डेटा के मुताबिक दावा किया गया है कि 2016 से 2018 तक अकेले दिल्ली में मैनुअल स्कैवेंजिंग के कारण 429 मौतें हुई हैं.

नेशनल कमीशन फ़ॉर सफाई कर्मचारी (NCSK) के मुताबिक 1 जनवरी 2017 से हर पांच दिन में एक व्यक्ति की मौत देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई से हुई है.

2016 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया कि सफाई कर्मचारी आंदोलन के मुताबिक सीवर कि सफाई करने वाले 1300 लोगों कि जान गयी.

यह बहुत अफ़सोस कि बात है कि एक तरफ भारत चाँद पर जाने के लिए अग्रसर है और अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन को लॉन्च करने की योजना बना रहा है. वहीँ दूसरी तरफ भारत अभी तक इस आपदा से गुज़र रहा है जहां सफाई कर्मचारियों को बिना किसी उपकरण के ज़हरीले सीवर और सेप्टिक टैंकों में उतारा जाता हैं.

क्यों भारत सरकार अब तक देश में कोई ऐसी मशीन नहीं ला पायी जिससे किसी इंसान को सीवर की सफाई करने के लिए सीवर या गटर में उतरना न पड़े.

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