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OBC की 17 जातियों को SC का दर्जा दिए जाने के योगी सरकार के फैसले पर होगी सुनवाई

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उत्तर प्रदेश में OBC की 17 जातियों को SC का दर्जा दिए जाने के योगी सरकार के फैसले पर शुक्रवार (आज) को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी

उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय पर सुनवाई करने के लिए चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष अधिवक्ता राकेश गुप्ता ने सुनवाई की मांग की थी. वकील राकेश गुप्ता का कहना था कि योगी सरकार का यह निर्णय गलत व असंवैधानिक है.

वकील ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में याचिका लंबित है. इसलिए इस याचिका पर सुनवाई होनी जरूरी है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ अब इस मामले पर आज सुनवाई करेगी.

योगी सरकार द्वारा OBC से जिन जातियों को SC में शामिल करने की बात कही गयी हैं उनमे निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआ, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुहा और गौड़ जैसी जाति शामिल है.

योगी सरकार के इस फैसले से पहले भी SP और BSP ने भी पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रयास किया था, लेकिन कानूनी हस्तक्षेप के चलते इन पर अमल नहीं हो पाया.

पिछड़ी जातियों को SC में शामिल तभी किया जा सकता है जब उसे केंद्र सरकार की तरफ से अनुमति हो. योगी सरकार के इस फैसले पर केंद्र की तरफ से अनुमति मिलने की संम्भावना हैं.

OBC से SC में जातियों को शामिल करने का कारण

योगी सरकार का मकसद सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण का लाभ प्रदान कराना हैं.

इसलिए योगी सरकार प्रयास कर रही हैं पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण की सुविधा मिल सकें.

योगी सरकार इन 17 जाति समूहों द्वारा 15 साल पुरानी मांग को पूरा कराना चाहती हैं.

SP और BSP के प्रयास के बाद तीसरी बार राज्य सरकार ने 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित वर्ग में शामिल करने का प्रयास किया है.

2004 में मुलायम सिंह द्वारा एक प्रस्ताव पेश करने पर पहला प्रयास किया गया था. SP सरकार ने पिछड़े वर्ग (OBC) की 17 जातियों को अनुसूचित वर्ग (SC) में शामिल करने के लिए UP लोक सेवा अधिनियम, 1994 में संशोधन किया था. लेकिन केंद्र के पास शक्ति होने के कारण उनका यह प्रयास अधूरा रह गया था.

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