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सोनिया गांधी कांग्रेस कीअंतरिम अध्यक्ष, बतौर अध्यक्ष राहुल का 20 महीना कैसा रहा ?

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दिल्ली :  कांग्रेस अध्यक्ष को चुनने के लिए शनिवार को आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया है.

 

कांग्रेस की लंबी तलाश बीते शनिवार को खत्म हो गई, और आखिरकार पार्टी को अपना अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के रूप में मिल गया.

 

खैर इन सब से इतर हम उस 20 महीने के सफर पर चलते हैं जिसे तय करने के बाद भी राहुल गांधी को मंज़िल नहीं मिली.

 

परिवार की सफल और समृद्ध विरासत, बड़ा संगठन, सिपहसालारों की फौज और जीतोड़ मेहनत भी बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को राजनीति के उस मुकाम तक नहीं पहुंचा सकी जहां उनसे पहले गांधी-नेहरू परिवार के कई लोग न सिर्फ पहुंचे, बल्कि लंबे समय तक बने रहे.

कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की करीब 20 महीने के सफर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावी जीत के तौर पर बड़ी सफलताएं मिली, लेकिन इस साल के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार उनकी नाकामी की बड़ी इबारत लिख गया और इसी के साथ पार्टी के मुखिया के तौर पर उनकी अध्यक्षता की पारी समाप्त हो गयी.

 

जहां राजनीतिक महकमे में जनता के आखों में सोशल मीडिया और मेन स्ट्रीम मीडिया की मदद से राहुल की छवि एक नाकाम, पप्पू राजनेता के तौर बना दी गई, वहीं दिसंबर, 2017 में हुए गुजरात चुनाव में कांग्रेस भले ही मामूली अंतर से हार गई, लेकिन कई सियासी जानकारों ने राहुल गांधी के नेतृत्व और पार्टी की चुनावी रणनीति की तारीफ की.

 

आपको बता दें कि, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र राहुल ने अपनी सियासी पारी के आगाज से ही मीडिया, आमजन और बौद्धिक वर्ग का ध्यान खींचा और पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने फिर दिसंबर, 2017 में गुजरात चुनाव के समय कांग्रेस अध्यक्ष बने.

 

जहां राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई तो 2018 के आखिर में हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत ने उनके नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर दिया.

 

इन तीन हिंदी भाषी राज्यों में जीत से उत्साहित कांग्रेस और राहुल को लगा कि 2019 के चुनाव में केंद्र की सत्ता में भी वापसी होगी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व भाजपा की बड़ी जीत ने उनकी उम्मीदों को नष्ट कर दिया. साथ ही गांधी अपनी परंपरागत अमेठी सीट से हार गए.

 

लोकसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की स्थिति यह है कि वह 2014 के अपने 44 सीटों के आंकड़ों में महज कुछ सीटों की बढ़ोतरी कर पाई और उसे 52 सीटें मिली.

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद 25 मई को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उस वक्त उनके इस्तीफे को अस्वीकार करते हुए सीडब्ल्यूसी ने उन्हें पार्टी में आमूलचूल बदलाव के लिए अधिकृत किया था, हालांकि गांधी अपने रुख पर अड़े रहे और स्पष्ट कर दिया कि न तो वह अध्यक्ष बनेंगे और न ही गांधी परिवार का कोई दूसरा सदस्य इस जिम्मेदारी को संभालेगा.

वैसे, गांधी ने यह भी कहा है कि वह अध्यक्ष नहीं रहते हुए भी पार्टी के लिए सक्रियता से काम करते रहेंगे.

हालांकि शानिवार को हुए CWC की बैठक में कई नाम अध्यक्ष पद की रेस में दौड़ रहे थे. जिसमें सबसे आगे मुकुल वासनिक का नाम था.

वहीं एक समय ऐसा आया जब कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस हेडक्वार्टर के बाहर प्रियंका गांधी वाड्रा को अध्यक्ष बनाने के ज़िद पर अड़ गए और प्रदर्शन करना शुरू कर दिया.

और आखिरकार, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद और हरीश रावत ने बैठक ख़त्म होने के बाद बताया कि सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया है और अध्यक्ष पद से दिया गया राहुल गांधी का त्यागपत्र भी स्वीकार कर लिया गया है.

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