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मैं माँ की गोद में मरना चाहता था; मौत की देहलीज़ पर खड़े कैदी ने लगायी सुप्रीम कोर्ट से गुहार

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कैंसर से पीड़ित 42 वर्षीय आशु जैफ 6 जून को सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने पहुँच गए. उसने याचिका में कहा कि वह कैंसर के तीसरे स्टेज में है. अंतिम सांसे अपनी मां की गोद में लेना चाहता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया.

जैफ के खिलाफ IPC की धारा 489-ए, बी, सी और डी और धारा 511 के तहत केस दर्ज किया गया था. कोर्ट को बताया गया था कि जेल में रहते हुए जैफ के मुंह के कैंसर का पता चला था. लेकिन सही इलाज नहीं होने के कारण कैंसर बढ़ाता गया और कैंसर दूसरे से तीसरे चरण में चला गया. जैफ के वकील का कहना है कि उनके क्लाइंट को रोज रेडियोथेरेपी से गुजरना पड़ता है. इसकी वजह से वह ठोस भोजन नहीं ले पा रहे हैं. लिक्विड भोजन ले रहे हैं. इस वजह से उनका वजन कम हो रहा है.

चलिए आपको मामला बताते हैं

पिछले साल आशु के पास 23 लाख के नकली नोट बरामद हुए थे.जयपुर में जैफ के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. वह पिछले 8 महीने से जयपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है.जैफ का इलाज जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में चल रहा है. जैफ ने बेल के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. अपने बेहतर इलाज के लिए उसने जमानत मांगी थी. लेकिन कोर्ट ने मना कर दिया था. इसके बाद आशु जैफ अपनी याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

याचिका में कहा गया था कि निचली अदालत में मामले की सुनवाई में काफी समय लगेगा. तब तक आशु जैफ की मौत हो जाएगी. हो सकता है कि सुनवाई की कार्यवाही को समझने में वह अपना मानसिक संतुलन खो दे. कैंसर के मरीजों के साथ अक्सर ऐसा होता है कि वे उम्मीद खो देते हैं. जैफ ने अपनी याचिका में कहा कि मैं भी जीने की उम्मीद खो चुका हूं और अब अपनी मां की गोद में मरना चाहता हूं, जिससे आखिरी समय में मां और अपनों का साथ मिल सके.

बेंच ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट को जांचने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी, मामले की सुनवाई जस्टिस इंदिरा बनर्जी और अजय रस्तोगी की वेकेशन बेंच कर रही थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि कैंसर पीड़ित आशु जैफ को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है. राजस्थान सरकार के वकील संदीप झा ने कहा कि जैफ को सबसे अच्छा इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है.

जैफ के वकील का तर्क है कि दीपक कुमार मीणा जो जाली नोटों का उत्पादन कर रहे थे, जाली नोटों के मार्किट तक पहुंचाने वाले सुनील कुमार मीणा को पहले ही जमानत दी जा चुकी है. इसलिए मेरे क्लाइंट की जमानत याचिका पर भी विचार किया जाना चाहिए.

जस्टिस रस्तोगी ने कहा कि अदालत के समक्ष याचिका अलग है क्योंकि जैफ ने केवल मेडिकल ग्राउंड पर जमानत मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को राजस्थान सरकार से जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल के बिरला कैंसर केंद्र से भी जवाब मांगा था. इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.

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