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Bihar: बाढ़ के कारण चार लोगों की मौत, 18 लाख लोग प्रभावित हुए

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बिहार के सीतामढ़ी, शेहर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, दरभंगा, सुपौल और किशनगंज जिलों में बाढ़ के बाद लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं. PTI की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 4 लोग मारे गए और 18 लाख लोग प्रभावित हुए.

नेपाल में लगातार वर्षा और पड़ोसी देश में बीरपुर बैराज से अतिरिक्त जल निर्वहन के कारण बाढ़ आई है. बैराज के सभी 56 गेट शनिवार शाम को खोले गए, जिससे कोसी, गंडक और बागमती नदियों का स्तर बढ़ गया. बैराज से चार लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से सुपौल, किशनपुर, मरौना और निर्मली जैसे इलाकों में पानी भर गया है.

उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी और शेहर के 200 से अधिक गाँवों में बागमती के पानी छोड़े जाने से बाढ़ आ गई है.

राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे सामुदायिक रसोई में हजारों लोग शिविरों में रह रहे हैं और खा रहे हैं. कई स्थानों पर आसपास के जिलों में सड़क यातायात ठप पड़ गयी हैं.

मुजफ्फरपुर के सीतामढ़ी और गायघाट ब्लॉक के नानपुर ब्लॉक को जोड़ने वाली सड़क कई स्थानों पर पानी में समा चुकी हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने रविवार को बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया.

लेकिन यह बात समझ नहीं आती हवाई सर्वेक्षणम करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी पता हैं कि, राज्य में हर साल बाढ़ आती हैं और हर साल लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं, तो पहले कोई कदम क्यों उठाया जाता ? यदि नेपाल के पानी छोड़े जाने से राज्य में बाढ़ आ जाती हैं और 18 लोगों को प्रभावित कर देती हैं, तो अब तक इतने सालों में नेपाल के साथ बात-चित कर के कोई सही उपाय क्यों नहीं ढूंढा गया…?

बिहार भारत का सबसे अधिक बाढ़ वाला राज्य है, जिसकी 76 प्रतिशत आबादी उत्तर बिहार में बाढ़ की तबाही के आवर्ती खतरे में है. कुल भौगोलिक क्षेत्र 94163 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 68800 वर्ग किमी में 73.06 प्रतिशत बाढ़ प्रभावित है.

वर्ष 1998 में उत्तरी बिहार की अधिकांश नदियों में जुलाई के पहले सप्ताह में अधिकतम डिस्चार्ज के कारण नदियों के किनारे तटबंध पर अत्यधिक दबाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर नुकसान हुआ. बुरही गंडक, बागमती, अधवारा और कोसी के तटबंध आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए. 380 लोगों की मृत्यु हुई और 9,284 लाख रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। लगभग 36,696.68 लाख रुपये की फसल क्षति हुई.

साल 1998 में बाढ़ के कारण 380 लोगों की जान गयी थी और आज 2019 में 18 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. आंकड़े देखिये और खुद ही सोंचिये, इन 21 सालों में क्या कुछ बदला है. अगर कुछ बदला हैं तो बस दिन बदले हैं, कैलेंडर पर तारीख बदली हैं, साल बदले और त्रासदी की सूरत बदली हैं.

हर साल बाढ़ आती हैं हर साल राज्य में त्रासदी की स्थिति उत्पन हो जाती हैं. और स्थिति सामान होने के बाद सब कुछ भुला दिया जाता हैं.

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