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उड़ीसा में माता- पिता के धर्म बदलने के कारण टूटा परिवार, बेटियों ने अन्य धर्म को अपनाने से किया इंकार

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अंधविश्वास के चलते उड़ीसा के एक परिवार के माता- पिता ने धर्मांतरण कर लिया. दंपति की तीन बेटियां हैं और तीनों बेटियों ने अपने माता- पिता की बात से इंकार करके धर्म को नहीं बदलने कहा. जिस कारण यह पूरा परिवार टूट गया है.

दरअसल, उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के कंटियामुंदा गांव के निवासी वीरेन्द्र धरुआ और उनकी पत्नी रजनी धरुआ  दोनों ने अंधविश्वास में पड़कर अन्य धर्म को अपना लिया हैं. माता- पिता के धर्मांतरण के बाद उनकी तीनों बेटी जिसमें बड़ी बेटी मीता धरुआ (20), दूसरी बेटी नीता धरुआ (17) और तीसरी बेटी सस्मिता धरुआ (13) अपने धर्म व संस्कृति को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.

माता- पिता के अन्य धर्म को अपनाने के बाद तीनों बहनें फिलहाल अपने एक रिश्तेदार के घर में 22 दिन से रह रही हैं. इस बात सूचना विहिप के कार्यकर्ताओं को पता चलने के बाद उन्होंने इन तीनों बहनों के हाल पूछे. विहिप के कार्यकर्ता इस अलग हुए परिवार को फिर से बसाने के प्रयास लगे हुए हैं.

इस मामले की जानकारी विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता शांतनु कुसुम व अन्य सदस्य तक पहुंची तो विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता तीनों बहनों से मिलने पहुंचे और तीनों बहनों की धार्मिक भावना को ठेस न पहुंचे और वह समाज में सम्मान के साथ रह सकें. इसके लिए उन्होंने परिवार वालों के साथ बातचीत की.

ओडिशा में धर्मांतरण निषेध होने के बावजूद, धर्मांतरण करने वालों पर उन्होंने नाराजगी जताई और प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.

इससे पहले धर्मांतरण की जानकारी होने पर 14 जून को गोंड समाज की बैठक हुई थी. जिसमें रजनी धरुआ हिन्दू धर्म का त्याग करके किसी अन्य धर्म को स्वीकारने के लिए अड़ गई थी, लेकिन रजनी धरुआ की तीनों बेटियां हिन्दू धर्म में बने रहने पर ही डटी रही.

जिसके बाद समाज ने तीनों बहनों को उसके ताऊ डमरूधर धरुआ को सौंपने का निर्णय लिया था और वहां से तीनों बहनों को आश्रम भेजने की तैयारी की जा रही है.

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