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इंडो असाही ग्लास फैक्ट्री सील (IAG), डूब जायेंगे मज़दूरों के करोड़ों रुपये?

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सोमवार को भुरकुंडा के भदानी नगर स्थित इंडो असाही ग्लास फैक्ट्री (IAG) को कोलकाता हाइकोर्ट के निर्देश पर सील कर दिया गया है. स्वास्तिक रोडवेज के बकाए के एवज में कार्रवाई की गई है.बताया जा रहा है की बकाया रकम 44 लाख रुपए थी.

सात सदस्य लिक्विडेटर की टीम ने इस कार्रवाई को पूरा किया. कार्रवाई से पहले टीम ने फैक्ट्री के अंदर मुआयना कर संपत्ति का आकलन करने गयी थी. इस क्रम में स्टॉक की जांच करते हुए टीम ने मशीन और प्रशंषिक भवन का भी जायजा लिया गया.

जांच करने आयी टीम ने बताया कि साल 2013 में कई लोगों ने कंपनी पर बकाया को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट के दरवाज़े पर दस्तक दी. इस पर सुनवाई करते हुए कोलकाता हाईकोर्ट ने बकाया भुगतान के लिए कई बार फैक्ट्री को मोहलत दी.

इंडो असाही ग्लास (IAG) फैक्ट्री के बकाया रकम नहीं चुकाने पर स्वास्तिक रोडवेज ने साल 2013 में कोलकाता हाइकोर्ट में मामला दर्ज कराया था. हाइकोर्ट ने फैक्ट्री को सील करने का आदेश 30 जनवरी 2019 को दिया था. लेकिन फैक्ट्री कर्मियों के विरोध करने पर फैक्ट्री को सील नहीं किया जा सका था.

स्वस्तिक रोडवेज के 44 लाख 74 हज़ार 30 रूपए के भुगतान को लेकर सख्त हुआ. इस पर फैक्ट्री के अनिरुद्ध जोशी ने कोर्ट से फिर कुछ समय कि मोहलत मांगी मगर कोर्ट अपने फैसले को जारी रखा और इंडो असाही ग्लास फैक्ट्री को लिक्विडेशन में डाल दिया.

परिसंपतियों के आंकलन के बाद टीम ने फैक्ट्री के दरवाज़े को सील कर दिया और साथ ही लिक्विडेटर का नोटिस चिपका दिया. नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि फैक्ट्री कि सारी संपत्ति अब कोलकाता हाईकोर्ट के अधीन है.

आपको बता दें स्वस्तिक रोडवेज का बकाया एकलौता नहीं है, इंडो असाही ग्लास फैक्ट्री पर SBI और PNB बैंक का भी करीब 51 करोड़ रुपये बकाया है, जिसको लेकर बैंकों द्वारा फैक्ट्री के गेट पर लगातार नोटिस चिपकाया जाता रहा है. कंपनी गुजरात के व्यवसायी आरएस खेमका की है.

आपको बता दें कि फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों का भी करोड़ों रुपये बकाया है. अब फैक्ट्री बंद होने पर फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूर खुद को ठगा हुआ और लाचार महसूस कर रहे हैं. फैक्ट्री सील होने के बाद मज़दूरों ने कहा कि उन के साथ हमेशा से अन्याय हुआ है. वो भी लंबे वक्त से बकाया के लिए संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन उनके मामले को हमेशा से नज़रअंदाज़ किया गया है. फैक्ट्री बंद होने के बाद एक तो हमारा पैसा बकाया है और तो और हम सब सड़क पर आ गए हैं.

फैक्ट्री के बंद होने से हज़ारों मज़दूरों व कर्मचारियों के हाथों से रोजगार छीन गया. इंडो असाही ग्लास फैक्ट्री से बेरोजगार हुए लोग परेशान और बेबस नज़र आ रहे हैं.

आपको बता दें कि, इंडो असाही ग्लास फैक्ट्री भारत की सबसे पुराणी ग्लास फैक्टरियों में से एक है. इसकी नींव लाला गुरुशरण लाल भदानी ने 1952 में रखी थी. वहीँ साल 1957 में जापान की कंपनी इंडो असाही ने इसे खरीद लिया. हालत बिगड़ने पर जापानी कंपनी ने 1999 में फैक्ट्री को खेमका ग्रुप के हाथों बेच दिया.

यहाँ से फैक्ट्री की हालत और बुरी हो गयी. खेमका प्रबंधन ने 2004 के अक्टूबर महीने में पूरी तरह बंद कर दिया.

इसके बाद विजय जोशी प्रबंधन ने फैक्ट्री को साल 2004 में शुरू किया लेकिन फैक्ट्री के शुरू होने और बंद होने का सिलसिला थमा नहीं. लगभग ढाई सालों तक मजदूरों को वेतन के लिए तड़पाने के बाद प्रबंधन ने तकनिकी कारणों का हवाला देते हुए फैक्ट्री की भट्टी को बंद कर दिया.
किसी कारण से फैक्ट्री साल 2011 के अप्रैल महीने में बंद हो गयी थी लेकिन दो साल बाद वर्ष 2013 में फैक्ट्री को फिर से चालू किया गया था.

लेकिन यहाँ पर सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि बेरोजगार हुए मज़दूरों का अब क्या होगा. मज़दूरों का बकाया वेतन कौन देगा. बैंको और मज़दूरों के पैसे न चुकाने पर खेमका को सजा होगी या फिर ये भी मोदी और माल्या की तरह सात समंदर पार हो जायेंगे.

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