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यौन उत्पीड़न मामले में झारखंड विधायक प्रदीप यादव की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज

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अपनी ही पार्टी के तत्कालीन महिला प्रवक्ता के साथ यौन उत्पीड़न मामले में आरोपित JVM के पौड़ेयाहाट से विधायक प्रदीप यादव की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को एडीजे प्रथम के न्यायालय में ख़ारिज कर दी गयी..

इससे पहले सोमवार (17 जून ) को अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने के बाद ADJ प्रथम ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

पहले से इस याचिका पर सुनवाई की तारीख 11 जून को निर्धारित थी और साथी केस डायरी की भी मांग की गयी थी. कोर्ट के आदेश पर केस डायरी जल्द से जल्द जमा कर दी गयी. न्यायालय में विस्तार से बहस सुनने के लिए अगली तिथि 17 जून को निर्धारित की गयी थी.

यौन उत्पीड़न के आरोपी विधायक प्रदीप यादव से 13 जून को साइबर थाना देवघर में पूछताछ की गई थी. SDPO, साइबर DSP और इंस्पेक्टर ने प्रदीप यादव से घंटो पूछताछ की थी.

क्या था मामला

आपको बता दें कि, झारखंड विकास मोर्चा (JVM) की प्रदेश प्रवक्ता ने अपनी ही पार्टी के प्रधान महासचिव और गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से महागठबंधन के उम्मीदवार रहे प्रदीप यादव पर छेड़छाड़ का आरोप लगया था. उन्होंने देवघर के महिला थाने में प्रदीप यादव के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया था. पीड़ित महिला रांची के हटिया की रहने वाली हैं और झारखंड हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस कर रही हैं.

पीड़िता का आरोप था कि बीते 20 अप्रैल को देवघर के मोहनपुर में महागठबंधन की ओर से एक जनसभा का आयोजन किया गया था, जिसमें बाबूलाल मरांडी, हेमंत सोरेन, हरिनारायण राय और प्रदीप यादव जैसे दिग्गज उपस्थित थे. जनसभा खत्म होने के बाद प्रदीप यादव ने उन्हें पार्टी के काम से एक होटल में बुलाया, जहां कुछ लोगों से मिलवाने की बात हुई थी.

पीड़ित ने बताया था कि, ‘तकरीबन साढ़े आठ बजे वह होटल पहुंची. उसी वक्त प्रदीप यादव ने उनके साथ बदसलूकी की और छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की. इसके बाद उन्होंने ने बाबूलाल मरांडी को फोन किया और घटना की पूरी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा.’ महिला का आरोप है कि प्रदीप यादव के तरफ से उन्हें लगातार धमकी दी जा रही थी.

इस मामले में पूर्व प्रधान महासचिव प्रदीप यादव का भी बयान आया था, उन्होंने कहा था कि उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत BJP फंसाने की कोशिश कर रही है. मनगढ़ंत आरोप लगाकर उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि निशिकांत दुबे को हार का डर सता रहा है. लिहाजा तरह-तरह के हथकंडे का इस्तेमाल किया जा रहा है. हलांकि पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट चुकी है.

इस मामले में प्रदीप यादव का कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है. समय आने पर सभी बातों का खुलासा हो जाएगा.

45 दिनों बाद भी मुझे न्याय नहीं मिला

वहीं पीड़िता का कहना है कि विधायक कि गिरफ़्तारी नहीं होने के पीछे पार्टी के बड़े नेताओं हाथ है. उन्होंने कहा कि देवघर महिला थाना में केस दर्ज कराने के 45 दिनों बाद भी मुझे न्याय नहीं मिला है. उन्होंने ने कहा कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य महिला आयोग से गुहार लगाने के बावजूद अभी तक न्याय नहीं मिला है.

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