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पत्रकार प्रशांत कनौजिया को योगी सरकार तुरंत करे रिहा : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से पत्रकार प्रशांत कनौजिया को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महज एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए किसी शख्स को लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा सकता.

साथ ही कोर्ट ने कहा है कि वह कनौजिया के ट्वीट का समर्थन नहीं करता है, लेकिन 22 जून तक न्यायिक हिरासत उचित नहीं है. बता दें कि प्रशांत की गिरफ्तारी के खिलाफ उनकी पत्नी जगीशा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

एक समाचार संसथान के मुताबिक, मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने कहा है कि एक नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है, उसे बचाए रखना जरूरी है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस बिच IPC की धारा 505 के तहत इस मामले में FIR दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए. अदालत ने यूपी सरकार से पूछा है कि किन धाराओं के तहत ये गिरफ्तारी की गई है. ऐसा पोस्ट शेयर करना सही नहीं था लेकिन गिरफ्तारी क्यों हुई है.

क्या था मामला?

पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने ट्विटर पर हेमा नाम की एक महिला का वीडियो शेयर किया था. वीडियो को शेयर करते हुए प्रशांत ने एक कमेंट भी लिखा था. पूरा बवाल यहीं से शुरू हुआ.

वीडियो में महिला (हेमा) पत्रकारों से बातचीत करते हुए योगी आदित्यनाथ से प्यार संबंधी दावे कर रही थी. महिला ने दावा किया कि वो पिछले एक साल से योगी आदित्यनाथ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए टच में है. महिला का कहना था कि वो पूरे प्रकरण के चलते तनाव में हैं और योगी आदित्यनाथ को सामने आकर उनसे बातचीत करनी चाहिए.

यूपी सरकार ने कहा, ”इस मामले में मजिस्ट्रेट का आदेश है और उसे चुनौती दिया जाना जरूरी है.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”हम इस देश में रह रहे हैं जो शायद दुनिया का सबसे अच्छा संविधान है. कानून के मुताबिक चलिए लेकिन प्रशांत को रिहा करिए.” जिसपर पर यूपी सरकार ने कहा, ”इससे ट्रायल भी प्रभावित होगा’.

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