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कारगिल युद्ध: झारखंड के इन जवानों ने दुश्मनों को खत्म करने में निभाई भूमिका

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कारगिल युद्ध में विजय पाए हुए भारत को 20 साल हो चुके है और इसी विजय पर भारत जश्न मना रहा है. कारगिल युद्ध में झारखंड के जवानों ने अपनी भूमिका निभाई थी.

सिपाही मानिक वारदा के हौंसले आज भी बुलंद

जिसमें से युद्ध के दौरान 7 बिहार रेंजीमेंट के सिपाही मानिक वारदा ने अपने हाथ- पैर गवां दिए थे. उनके हाैंसलाें में कहीं काेई कमी नहीं आयी है.

सिपाही मानिक वारदा ने कहा कि भले ही करगिल युद्ध काे 20 साल बीत गये हाे, लेकिन उनके लिए यह कल की बात है. पाकिस्तान का नामाेंनिशान मिटाने की तमन्ना उनके दिल में आज भी है.

सिपाही मानिक वारदा ने बताई कारगिल की कहानी

सिपाही मानिक वारदा ने बताया कि वह अपनी टुकड़ी के साथ 1999 में कारगिल युद्ध के लिए निकले थे. उन्हें उरी सेक्टर में बर्फीली पहाड़ियाें की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया. जैसे ही वे लाेग वहां पहुंचे जबर्दस्त फायरिंग ने उनका स्वागत किया.

फायरिंग से बर्फवाले पहाड़ खिसक रहे थे. इसी दाैरान बर्फीले पहाड़ ने उनके साथ 4 साथियाें काे अपने अंदर समा लिया. वे लाेग लगभग 18 घंटे बर्फ में दबे रहे. उनकी टुकड़ी के साथियाें ने उनकी खबर ली और उन्हें बाहर निकाला.

कारगिल में गुमला के तीन और पलामू का जवान हुआ शहीद

इनके अलावा कारगिल युद्ध में पलामू के पुत्र युगंबर दीक्षित दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे और गुमला जिले के 3 बेटे दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे.

इनमें शहीद जॉन अगस्तुस एक्का, शहीद बिरसा उरांव व शहीद विश्राम मुंडा शामिल हैं. जिले में आज भी इनका नाम सम्मान से लिया जाता है.

युगंबर दीक्षित के बेटे ने कहा पिता पर गर्व है

युगंबर दीक्षित के बेटे युद्धजय ने कहा कि अभी वह इंटर साइंस की पढ़ाई कर रहा है. वह भी सेना में जाकर अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करना चाहता है. युद्धजय का कहना है कि उसे इस बात का गर्व है कि उसके पिता ने देश के लिए अपने प्राणों की जान दी है.

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