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कर्नाटक : 14 बागी विधायकों के नाम, 2023 तक अयोग्य घोषित

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कर्नाटक विधानसभाध्यक्ष के. आर. रमेश कुमार ने रविवार को 14 और बागी विधायकों को दलबदल निरोधक कानून के तहत साल 2023 में विधानसभा के मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने तक अयोग्य करार दिया.

विधानसभाध्यक्ष का फैसला

विधानसभाध्यक्ष का यह फैसला मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा द्वारा विधानसभा में बहुमत साबित करने के एक दिन पहले आया है.

विधानसभाध्यक्ष की यह कार्रवाई कांग्रेस के 11 और जद(एस) के तीन विधायकों के खिलाफ की गई है. विधानसभाध्यक्ष ने अपने फैसले की घोषणा जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में की. उनका यह फैसला कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार गिरने के बाद येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के दो दिन बाद आया है.

येदियुरप्पा सरकार के भविष्य पर नहीं पड़ेगा प्रभाव

विधानसभाध्यक्ष की इस कार्रवाई का येदियुरप्पा सरकार के भविष्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि इन विधायकों के तत्काल प्रभाव से अयोग्य ठहराये जाने से उनकी अनुपस्थिति से सदन की प्रभावी संख्या कम हो जाएगी जिससे भाजपा के लिए आगे की राह आसान हो जाएगी.

हफ़्तों चला कर्नाटक का नाटक

एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन सरकार द्वारा पेश विश्वासमत पर मतविभाजन के समय 20 विधायकों के अनुपस्थित रहने से कई सप्ताह के ड्रामे के बाद उनकी सरकार गिर गई थी.

इन 20 विधायकों में 17 बागी विधायक तथा एक-एक कांग्रेस और बसपा का और एक निर्दलीय था.

प्रभावी संख्या 207 हो गई है

17 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिये जाने के बाद 224 सदस्यीय विधानसभा (विधानसभाध्यक्ष को छोड़कर जिन्हें मत बराबर होने की स्थिति में मतदान का अधिकार है) में प्रभावी संख्या 207 हो गई है. इसके साथ ही जादुई संख्या 104 रहेगी.

पार्टी द्वारा निष्कासित कर दिया गया

भाजपा के पास एक निर्दलीय विधायक के समर्थन से 106 सदस्य, कांग्रेस 66 (मनोनीत सदस्य सहित), जद(एस) 34 और एक बसपा का सदस्य जिसे विश्वासमत के दौरान कुमारस्वामी सरकार के लिए मतदान नहीं करने के लिए पार्टी द्वारा निष्कासित कर दिया गया है.

विधानसभाध्यक्ष पर उठे सवाल

कुमार से जब अयोग्य ठहराने के उनके विवादास्पद फैसले, जिस पर सवाल उठाये जा रहे हैं और पूरे मुद्दे पर उनके व्यवहार को लेकर आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया…मुझे 100 प्रतिशत आघात लगा है.’’

विधानसभाध्यक्ष की ओर से यह फैसला अचानक ऐसे समय आया है, जब भाजपा की ओर से यह संकेत दिया गया कि स्वेच्छा से पद नहीं छोड़ने पर वह उनके खिलाफ सोमवार को विधानसभा की बैठक के दौरान अविश्चास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है.

क्यों गिरी कांग्रेस जेडीएस सरकार

कुमार ने कहा कि वह यह कार्रवाई उन बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली कांग्रेस और जदएस की अर्जियों पर कर रहे हैं, जिन्होंने विधानसभा सदस्य के तौर पर अपने इस्तीफे सौंप दिये थे और जो एच डी कुमारस्वामी द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव पर मतविभाजन के दौरान मौजूद नहीं थे. उसके कारण कुमारस्वामी सरकार गिर गई थी.

कुमार ने कहा कि उन्होंने बागी विधायकों के उस अनुरोध को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफों और उनके खिलाफ अयोग्य ठहराने की अर्जियों को लेकर उनके समक्ष पेश होने के लिए और चार सप्ताह का समय मांगा था.

कार्यकाल की समाप्ति तक चुनाव नहीं लड़ सकता

विधानसभाध्यक्ष ने इससे पहले तीन बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के समय ही स्पष्ट कर दिया था कि दलबदल निरोधक कानून के तहत अयोग्य ठहराया गया कोई भी सदस्य वर्तमान सदन के कार्यकाल की समाप्ति तक चुनाव नहीं लड़ सकता. इस दलील को भाजपा, बागी विधायकों और कई अन्य विधिक विशेषज्ञों ने चुनौती दी है.

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