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केरल और तमिलनाडु स्वास्थ्य व्यवस्था में अन्य राज्यों से आगे

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भारत में केरल और तमिलनाडु की स्वास्थ्य व्यवस्था बाकी सभी राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्था से बेहतर है. नीति आयोग द्वारा तैयार की गई स्वास्थ्य की रिपोर्ट में हर साल की तरह केरल एक बार फिर से नंबर 1 आया हैं. इस सूची में UP, बिहार और ओडिशा सबसे पीछे हैं.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर जांच की गई तो उससे यह पता लगा कि तमिलनाडु ने अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पिछले 10 सालों में काफी तेज प्रगति की हैं. तमिलनाडु ने समेकित बाल विकास योजना (ICDS) को अपनाया और इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय और मानवीय संसाधनों को लगाया है. उदाहरण के लिए तमिलनाडु में आंगनबाड़ी केंद्र रोजाना 6 घंटे से अधिक खुलते हैं जबकि उत्तरी राज्यों में ये केवल 3 घंटे ही खुलते हैं. तमिलनाडु ने ही सबसे पहले स्कूलों में बच्चों को मुफ्त में भोजन (Mid day meal) देना शुरू किया था.

तमिलनाडु में सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में समय पर फ्री दवाओं की पूर्ति के लिए सरकार ने डिस्पेंसरी खोली हैं. तमिलनाडु के स्वास्थ्य केन्द्रों में मुफ्त दवा का अनिवार्य प्रावधान है. तमिलनाडु ने बच्चों के टीकाकरण के मामले में सबसे ऊँची दर हासिल की हैं.

अगर बात की जाए तो उत्तरी राज्यों की तो उत्तरी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत खराब हैं. हाल ही में UP के मथुरा के अगनोई में 100 लोगों की खराब पानी पीने से तबियत खराब हो गई. इसके अलावा झारखंड में चमकी बुखार से कई बच्चों को अपनी जान गवानी पड़ी.

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स्वास्थ्य के मामले में भारत इन देशों से हैं पीछे

भारत दक्षिण एशिया के कई पड़ोसी देशों से पीछे है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी GDP का केवल 3.66 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च कर रहा है.

जबकि चीन GDP का 4.88 प्रतिशत और नेपाल अपनी GDP का 6.29 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च कर रहा है.

बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति GDP भारत से कम है लेकिन लाइफ एक्सपेक्टेंसी का आंकड़ा भारत से बेहतर है.

BCG, DPT, पोलियो और खसरा इत्यादि टीकाकरण में बांग्लादेश ने 95 प्रतिशत के करीब कवरेज कर लिया है, जबकि भारत उससे पीछे है.

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