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जानिए साईं बाबा के 11 वचन, जिनसे होता है हर समस्या का समाधान.

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साईं को कुछ लोग चमत्कारी पुरुष, कुछ भगवान, कुछ अल्लाह मानते हैं. असल में साईं एक ऐसे संत थे. जिन्होंने धरती पर कई चमत्कार किए. साईं का पावन स्थल महाराष्ट्र माना जाता हैं. साईं को साईं की उपाधि महाराष्ट्र के एक क्षेत्र में शिरडी के लोगों ने दी थी. साईं की आराधना सभी धर्मों में की जाती हैं. गुरुवार को साईं नाथ की पूजा करने पर सभी की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं. साईं का एक बहुत प्रसिद्ध संवाद हैं ‘सबका मालिक एक’ जिसका अर्थ हैं ईश्वर को पाने के रास्ते भले ही अलग- अलग हो लेकिन जिसे हम पाना चाहते हैं, वह एक ही है.

साईं बाबा के 11 वचन

  • पहला वचन: ‘जो शिरडी में आएगा, आपदा दूर भगाएगा.’

इस वचन के अनुसार साईं का अर्थ हैं जो शिरडी आएगा उसकी सारी समस्या समाप्त हो जाएगी. जो लोग शिरडी नहीं जा सकते उनके लिए साईं मंदिर जाना भी पर्याप्त होगा.

  • दूसरा वचन: ‘चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर.’

साईं मंदिर में साईं की समाधि पर पहुंचते ही लोगों के दुःख दूर हो जाते हैं, लेकिन मन में श्रद्धा भाव का होना जरूरी है.

  • तीसरा वचन: ‘त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा.’

साईं कहते हैं कि मैं भले ही अब शरीर में न रहूं. लेकिन जब भी मेरा भक्त मुझे याद करेगा, मैं दौड़ के आऊंगा और अपने भक्त की सहायता करूंगा.

  • चौथा वचन: ‘मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस.’

साईं कहते हैं कि भक्त को अपने मन में विश्वास पक्का रखना चाहिए. अगर वह साईं की समाधि से कुछ मांगते हैं तो उनकी मनोकामना जरूर पूरी होगी.

  • पांचवां वचन: ‘मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो.’

साईं कहते हैं कि मझे हमेशा जीवित समझो. भक्त भक्ति और प्रेम से किसी भी सच्चाई को अनुभव कर सकता है.

  • छठवां वचन: ‘मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए.’

साईं कहते हैं मेरी शरण सच्ची श्रद्धा से आया हुआ कोई व्यक्ति खाली हाथ जाता हैं तो वह मझे बताएं.

  • सातवां वचन: ‘जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का.’

साईं का कहना हैं जो व्यक्ति मुझे जिस भाव से पुकारता है, उसी भाव से मैं उसकी कामना पूरी करता हूं.

  • आठवां वचन: ‘भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा.’

साईं ने अपने इस वचन में कहा जो व्यक्ति मुझ पर निर्भर होगा उसके जीवन के हर दायित्व को में पूरा करूंगा. वादा कभी मेरा झूठा नहीं होगा.

  • नौवां वचन: ‘आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर.’

इस वचन में जो भक्त सच्ची श्रद्धा से सहायता मांगेगा, साईं उसकी सहायता जरूर करेंगे.

  • दसवां वचन: ‘मुझमें लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया.’

जो भक्त मन, वचन और कर्म से साईं में लीन रहते हैं, साईं ने कहा मैं हमेशा उसका कर्ज़दारी रहूंगा. उस भक्त के जीवन की सारी जिम्मेदारी मेरी है.

  • ग्यारहवां वचन: ‘धन्य धन्य व भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य.’

साईं बाबा कहते हैं कि मेरे वो भक्त धन्य हैं जो अनन्य भाव से मेरी भक्ति में लीन हैं. ऐसे ही भक्त वास्तव में भक्त हैं.

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