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जानिए क्यों करती है महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत , विधि, मुहूर्त और व्रतकथा

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हरतालिका तीज का व्रत सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज व्रत अच्छे वर के लिए रखती हैं. हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा का महत्व है.

 

इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. 16 श्रृंगार करती हैं. शाम के समय व्रत कथा पढ़ती हैं और पूजन करती हैं. रात को चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर अपना व्रत खोलती है.

 

इस बार हरतालिका तीज को लेकर उलझने चल रही है. कुछ पंचांग 1 सितंबर को तीज बता रहे हैं तो कुछ 2 सितंबर को. ऐसे में महिलाएं 1 और 2 सितंबर में से किसी भी दिन तीज का व्रत रख सकती है.

 

शुभ मुहर्त

 

1 सितंबर को हरतालिका तीज का शुभ मुहर्त शाम 6 बजकर 44 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 1 मिनट तक रहेगा. वहीं 2 सितंबर को तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह 9 बजे से पहले ही पूजा कर लेनी होगी.

 

हरतालिका तीज पूजा विधि

 

  • हरतालिका तीज की पूजा करने से पहले भगवान गणेश, शिव जी और माता पार्वती का आह्वाहन करें और उनसे अपनी पूजा सफल कराने की प्रार्थना करें.
  • सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें. भगवान गणेश का रोली से तिलक करे और उन्हें दूब अर्पित करें.
  • इसके बाद तीनों की काली गीली मिट्टी से प्रतिमा बनाएं और उन्हें आसन ग्रहण कराएं.
  • इसके बाद उन पर फूल चढ़ाएं. फूल चढ़ाने के बाद 3 बार मंत्र पढ़कर आचमन करें और हाथ धो लें.
  • फिर परात में जल भरकर शिवजी को स्नान कराएं. भगवान शिव को फल और फूल चढ़ाएं.
  • भगवान शिव को सभी चीजें अर्पित करने के बाद माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें.
  • इसके बाद दोनों को सभी चीजें जो आपने पूजा में रखी है उन्हें अर्पित कर दें.
  • सभी चीजें अर्पित करने के बाद हरतालिका तीज की कथा पढ़े अथवा सुनें.
  • कथा पढ़ने के बाद भगवान गणेश, शिव और माता पार्वती की आरती उतारें.
  • अंत में अपने से बड़े सभी लोगों के पैर छुकर उनका आर्शीवाद लें.

 

हरतालिका तीज की कथा

 

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को पहली बार मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए किया था. मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अन्न और जल सभी का त्याग कर दिया था. उनके पिता की इच्छा थी कि पार्वती भगवान विष्णु से शादी कर लें. लेकिन मां पार्वती के मन मंदिर में भगवान शिव बस चुके थे और इसलिए उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और कठोर तपस्या शुरू कर दी.

 

इस दौरान मां पार्वती ने ना तो कोई अन्न ग्रहण किया और ना ही जल ही ग्रहण किया. इसलिए यह माना जाता है कि इस व्रत में अन्न जल ग्रहण नहीं करना चाहिए. मां पार्वती की कठोर तपस्या को देखकर भगवान शंकर उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया. मां पार्वती की कठोर तपस्या को देखते हुए हरतालिका तीज को इतना महत्व दिया जाता है.

 

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