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कोई बिन दवा मर रहा है, और झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री के गढ़वा जिले में एक्सपायर हो गयी दवाएं

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गढ़वा: झारखंड के गढ़वा में जो राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला भी वहां चिकित्सा व्यवस्था खुद बीमार पड़ी है. सही वक़्त और सही रूप से इलाज नहीं होने से मरीजों की मौत, अस्पतालों में दवाओं की कमी की खबर अक्सर अख़बारों में तांडव करते नज़र आती हैं.

एक स्थिति तो ये है कि मरीजों के परिजनों को नहीं मिलने कि वजह से बहार से दवा खरीदनी पड़ती है. वहीँ दूसरी परिस्थिति यह है कि बिना इस्तेमाल के ही दवाएं एक्सपायर हो रही हैं. सदर अस्पताल के NCD विभाग में बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो गईं. इन दवाओं को जिला कुष्ठ नियंत्रण विभाग के कार्यालय के बाथरुम में छुपा कर रखा गया था.

कुछ दवाएं दो महीने पहले तो कुछ 6 महीने पहले एक्सपायर हुई हैं. मगर जिले के नोडल पदाधिकारी और सिविल सर्जन की मने तो उन्हें अभी तक इस बात की खबर नहीं है.

झारखंड के गढ़वा का बड़ा इलाके के पानी में फ्लोराइड पाया जाता है. बड़ी संख्या में फ्लोराइसिस के मरीज सदर अस्पताल इलाज करने पहुंचते हैं. सदर अस्पताल के गैर संचारी रोग विभाग यानी NCD में फ्लोराइसिस मरीजों के इलाज के लिए सरकारी आपूर्ति व बाजार से खरीद कर करीब डेढ़ साल पहले दवाएं लाई गई थीं. इनमें आयरन की गोली फोलिक एसिड, दर्द निवारक गोली एसीक्लोरेक्स प्लस आदि शामिल हैं.

फोलिक एसिड (बैच नं टी 6501, उत्पादन तारीख 05/2017 तथा एक्सपायरी तारीख 04/2019 ) सरकारी आपूर्ति की गई है. वहीं एसीक्लोरेक्स प्लस (बैच नं एफटी 1701, उत्पादन तारीख 02/2017 तथा एक्सपायरी तारीख 01/2019 ) को बाजार से खरीदा गया है. इन दवाओं को फ्लोराइसिस प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल में लाया जाना था, लेकिन इस्तेमाल के नहीं होने से बर्बाद हो गईं.

नोडल पदाधिकारी हैं अनजान

NCD के जिला नोडल पदाधिकारी डॉ जेेपी ङ्क्षसह भी इन दवाओं के एक्सपायर होने से अनजान हैं. एक्सपायरी दवा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मियों से जानकारी मिलने के बाद ही कुछ कह सकते हैं. उन्हें इस बात की खबर नहीं है कि कितनी दवाएं खरीदी गईं और कितनो का इस्तेमाल हुआ है.

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