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ओडिशा का मोदी : संन्यासी जैसे रहन-सहन वाले प्रताप सारंगी बने सांसद

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भुबनेश्वर। बालासोर लोकसभा सीट से इस बार प्रताप सारंगी जीते हैं। उन्होंने बीजेडी प्रत्याशी रबिंद्र कुमार जोना को 12 हजार 956 वोटों से हराया है। प्रताप सारंगी ने कभी शादी नहीं की। उनकी मां का पिछले साल निधन हुआ था। सोशल मीडिया पर सारंगी की तस्वीरें ‘सुलगना डैश’ नाम के ट्वीटर हैंडल से शेयर हो रही हैं। तस्वीरों में सारंगी जमीन पर बैठकर कागजातों को निहार रहे हैं।

रिकॉर्ड बहुमत से जीते

एक बार फिर से लोकसभा चुनाव में मोदी की आंधी चली और एनडीए समेत बीजेपी ने रिकॉर्ड बहुमत से जीत दर्ज की है। जहां भारत में सभी तरफ मोदी की जीत के बहार फिजा में है। इस बीच, एक व्यक्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल है। इनका नाम प्रताप चंद्र सारंगी है। इस बार सारंगी ने लोकसभा चुनाव में ओडिशा के बालासोर से जीत का झंडा गाड़ा है। उन्हें जनता ‘ओडिशा का मोदी’ कहते सुने जा सकते हैं।

दिल्ली जाने की तैयारी

इन दिनों प्रताप सारंगी की तीन तस्वीरें शेयर हो रही हैं। इनमें एक यूजर ने लिखा है कि ये ओडिशा के मोदी हैं जिन्होंने शादी नहीं की है और इनके पास अधिक संपति भी नहीं है। छोटे से घर में रहने वाले सारंगी को जमीनी लोगों का भरपूर लगाव है और उनका इन्हें गजब का समर्थन रहता है। यहां से जीतकर वे सांसद बने हैं और दिल्ली जाने की तैयारी में जुटे हैं। लोग सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ करते नहीं थकते। लोगों का यहां तक कहना है कि उन्हें ओडिशा का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।

वे हैं मोदी के करीबी

सांसद का चुनाव जीतने से पूर्व प्रताप सारंगी राज्य के नीलगिरि विधानसभा सीट से एमएलए रह चुके हैं।
2004 और 2009 में वे दो बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं। इससे पहले सारंगी 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन मोदी लहर के बावजूद वे हार गये थे। वे पीएम नरेंद्र मोदी के काफी करीबी हो चुके हैं। जब मोदी ओडिशा आते हैं, तो सारंगी से जरूर मिलते हैं।

रामकृष्ण मठ में साधु बनने की थी इच्छा

प्रताप सारंगी का जन्म 4 जनवरी 1955 में नीलगिरि के गोपीनाथपुर गांव में गरीब परिवार में हुआ। सारंगी ने यहां के फकीर कॉलेज से स्नातक किया है। कुछ लोग बताते हैं कि प्रताप सारंगी बचपन से आध्यात्मिक रुझान वाले थे। वह रामकृष्ण मठ में साधु बनना की इच्छा रखते थे और वे इसके लिए कई बार मठ भी जा चुके थे, लेकिन जब मठ वालों को जानकारी हुई कि उनके पिताजी का निधन हो चुका है और मां अकेली हैं, तो उन्हें मठ वालों ने मां की सेवा करने को कहा था। प्रताप ने मां की सेवा करने के साथ ही जनसेवा भी शुरू की थी।

बालासोर और मयूरभंज के आदिवासी इलाकों में उन्होंने कई स्कूल बनवाये हैं। 2014 के चुनाव में दिये हलफनामे में सारंगी ने खुद के पास कुल दस लाख रुपये की संपत्ति होने का जिक्र किया है। संन्यासी जीवन जीने वाले सारंगी धर्म और आस्था में गहरा रुझान रखते हैं।

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