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Momentum Jharkhand : क्या हुआ उन करोड़ों निवेश और हज़ारों रोजगार का ?

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मुख्यमंत्री रघुवर दस के राज्य झारखंड में बेरोजगारी का साया गहराते जा रहा है. टाटा मोटर्स जैसी ऑटोमोबाइल बड़ी कंपनियां की बिक्री में आई गिरावट के कारण बहुत से लोगों को नौकरी का नुकसान हुआ और वैसी कंपनियों को राज्य में करोड़ों का घाटा सहना पड़ रहा है जो गाड़ियों के पार्ट्स बनाया करती है.

चलिए हम चलते हैं 2017 के फ़रवरी के महीने में जब राजधानी रांची की सड़कें लाईटों जगमगा उठी थी और राज्य के युवाओं को भी एक उम्मीद की किरण नज़र आयी थी कि अब बाहर से निवेशक आएंगे और झारखंड में निवेश करेंगे. फिर नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

मौका था “मोमेंटम झारखंड ग्लोबन इन्वेस्टर समिट” का जिसके आयोजन के लिए पूरे रांची का सौन्दर्यकरण किया गया था.

राजस्व और रोजगार की गति बनाए रखने के लिए, राज्य ने ‘मोमेंटम झारखंड समिट-2’ के लिए जमशेदपुर को चुना गया.

जहां लगभग 74 परियोजनाओं के आधारशिला रखी गई थी. इन परियोजनाओं में 2100 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष निवेश और 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संभावना जताई गयी थी, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल, विनिर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कपड़ा क्षेत्र शामिल किये गए थे.

बोकारो में एक तीसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम 20 दिसंबर को आयोजित किया गया था जब 105 कंपनियों के लिए आधारशिला रखी गई थी.

उस वक़्त सरकारी सूत्रों का कहना था कि, इससे 3,475 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 17,742 नौकरियां पैदा होंगी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि, राज्य सरकार 2018-19 में 50,000 युवाओं को रोजगार देने का प्रयास था.

लेकिन हम आज के झारखंड में कदम रखते हैं तो ऐसा लगता है मानों, वो सारे वायदे, वो नौकरियों की बातें महज़ लोक-लुभावन नारों तक ही सिमट कर रह गयीं.

क्यूंकि उसी जमशेदपुर में जहाँ से मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद आते हैं, उसी जमशेदपुर के आस पास के इलाके जैसे, सरायकेला और राजनगर जैसी जगहों पर, जो लोग ऑटो-सहायक यूनिटों में काम किया करते थे, उनकी नौकरी चले जाने की वजह से वो दैनिक मजदूरों की भीड़ में शामिल हो गए हैं.

इसी तर्ज पर, सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI) के अध्यक्ष अशोक भालोटिया, जो कि सबसे पुराने उद्योग संघों में से एक है और जो लगभग 600 MSMEs का प्रतिनिधित्व करता है, ने कहा: “हमारे विश्लेषण के अनुसार, जमशेदपुर में छोटी इकाइयों, ज्यादातर ऑटो में कम से कम 10,000 लोगों को रोजगार नहीं मिला है.

SCCI का अनुमान है कि MSME सेगमेंट को पिछले पांच महीनों में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

भालोटिया, जो चेचिस पर ऑटोमोबाइल बॉडी बनाने वाली कंपनी के भी मालिक हैं, ने कहा कि पिछले चार-पांच महीनों में उन्हें “करोड़ों रुपये” का नुकसान हुआ है.

अगर हम राज्य में बेरजगारी के आंकड़े के तरफ देखें हाल और बेहाल नज़र आता है.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकॉनमी CMIE के रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अप्रैल महीने के दौरान शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी की 16.9 तो वहीँ ग्रामीण क्षेत्र में 8.7 प्रतिशत दर्ज किया गया.

लिंग के मुताबिक

राज्य में जहां 10 फीसदी पुरुष बेरोजगार हैं तो वहीँ महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा और भी भयावह हो जाता है.झारखंड में करीब 35 फीसदी महिलाओं को बेरोजगार पाया गया.

यदि क्षेत्रों के हिसाब से पुरुषों की बात करें तो शहरी क्षेत्रों में 15.7 फीसदी लोगों को बेरोजगार पाया गया है. वहीँ ग्रामीण इलाक़े में 08 फीसदी महिलाएं बेरोजगार हैं.

शहरी क्षेत्र में महिलाओं के रोजगार का मामले और खतरनाक है. शहरी क्षेत्र में महिलाओं के बेरोजगारी का आंकड़ा 35.7 फीसदी दर्ज किया गया है.

इन आंकड़ों से हम समझ सकते हैं की झारखंड में जहां करोड़ों की निवेश की मदद से लोगों को हज़ारों रोजगार के अवसरों का सपना दिखाया गया था वो बस एक सपना बन कर रह गया है.

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